रोंग नंबर वाली की अन्तर्वासना


Wrong number wali ki antarvasna:

desi chudai ki kahani

नमस्कार भाईओं ,मुझे अपने से ज्यादा उम्र की लड़कियां और भाभिया मुझे पसंद है | इसीलिए मुझे जो भाभिया असंतुस्ट होती है और मुझे अपनी समस्या बताती है और मेरे साथ सेक्स करने की इच्छा जाहिर करती है तो मैं उन के साथ मुफ्त सेक्स करके उनको जरुर संतुष्ट करता हूँ | क्यूंकि अगर मेरे लंड से चुदकर किसी को खुशियाँ मिलती है तो ऐसी खुशिया मैं हर असंतुस्ट महिला या लड़की को देना चाहूँगा |
मेरा नाम रवि है मैं उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से हूँ | मेरी उम्र 22 साल है | मेरी लम्बाई 5’8”है | मेरे लंड की लम्बाई 7 इंच है और मैं अब चंडीगढ़ मैं जाब करता हूँ |

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एक दिन की बात है मेरे मोबाइल पर एक फ़ोन आया मैंने फोन उठाया दुसरे तरफ से एक हसीं आवाज़ की मालकिन ने खूबसूरत सा हेल्लो बोला | रांगनंबर पर उसकी आवाज़ इतनी सुन्दर थी की मेरा फोन काटने का मन नहीं हुआ तो मैंने बात थोडा खीचना चाहा पर फोन कट गया | पर मैंने उस नंबर पे मैसेज भेजने लगा | थोडा टाइम लगा पर हमारी बातें एक दुसरे से होने लगी | उसने अपना नाम निशा बताया | बातों बातों में हम एक दुसरे के बारे में बहुत कुछ जान गए और अच्छे दोस्त बन गए और तकरीबन हम रोज बातें करने लगे इधर –उधर की | मैंने उससे उसके मासिक चक्र के बारे में पूछा पहले तो वो थोड़ा हिचकिचाई पर फिर मेरे बार बार आग्रह करने पर उसने मुझे बताया की कब उसे महीना आता है | मैंने उससे पूछा क्या उसमे दर्द होता है तो उसने बताया की हा थोडा होता है | और फिर इसी तरह हम दोनों आपस मैं काफी खुल गए और फोन सेक्स करने लगे | बस हम दोनों को उसी दिन का इन्तजार था की जब वो अपने मामा के यहाँ से चंडीगढ़ आएगी | क्यूंकि जिस दिन मैंने बताया था की मैं चंडीगढ़ में रहता हूँ तो उसने बताया की वो रहती तो चंडीगढ़ में ही पर वो अपने मामा के यहाँ लुधियाने में 10+2 की पढाई पूरी कर रही है | और ये उसका आखरी साल था | वह आने वाली थी हम दोनों को एक दुसरे का बेसब्री से इंतजार था |

आखिर वो दिन भी आ गया जिसका हम दोनों को बेसब्री से इंतज़ार था | और मैंने उसको मिलने का प्रोग्राम बनाया मैंने पहली बार उसको देखा उसका बदन उसकी उम्र के हिसाब से काफी उठान पर था | चेहरे के साथ ही उसका पूरा बदन बहुत मस्त था उसका फिगर 38-32-36 था |और उसका गोरा बदन देख कर मेरा मन तो कह रहा था की वही पार्क मैं उसे गिरा लू पर मैंने खुद को कंट्रोल किया | और आकर वो मेरे गले लग गयी तब मैंने उसके स्तनों के उभार को महसूस किया तो मैंने भी उसे अपनी बांहो में जकड लिया | जिससे हम दोनों एक दुसरे के ताप को महसूस कर सके | मैं तो उसके गुलाबी होंठो को चूस कर उनका स्वाद लेना चाहता था पर उसने मुझे पहले ही आगाह कर दिया की ये सर्वजनिक स्थान है | मैं वही पर रुक गया और मैंने उससे कहा की चलो हम दोनों मेरे घर चलते है पर उसने कहा की उसे पहले भूंख लगी है | फिर हम दोनों एक रेस्टोरेंट मैं पहुचे और मैंने कहा की तुम्हे जो खाना है हम पैक करा लेते है घर पर खायेंगे तो उसने कहा नहीं हम यंही खायेंगे इतनी जल्दी क्या है पर वो क्या जाने मुझे अब कंट्रोल नहीं हो रहा था | एक साल से मैं उसका इंतजार कर रहा था और अब उसके जिस्म की गर्मी महसूस करने के बाद सब्र नहीं हो रहा था और वो मेरी टांग खीचे जा रही थी | फिर मैंने सोंचा कही ऐसा तो नहीं की ये सिर्फ फोन सेक्स करके खुश है और मैं ही ख्याली पुलाव पका रहा हूँ | मैं अपने जज्बात दिखाकर बात खराब करना नहीं चाहता था मेरे पास उसके हिसाब से चलने के अलावा और कोई चारा नहीं था | मेरे अन्दर न जाने क्या चल रहा था की तब तक उसने अपने पैर से मेरे पैर में गुदगुदी लगाकर मानो जलती हुई आग मैं घी डाल दिया था अब तो मेरा लंड पेंट फाड़ने के लिए तैयार था और लंड में दर्द भी होने लगा था बस मैं किसी तरह उस मैं समां जाना चाहता था वो थोड़ी देर बाद सामने वाली कुर्सी से उठकर मेरे बगल वाली कुर्सी पर बैठ गयी और मेरी जांघ पर हाथ रख दिया शायद मेरे चेहरे से उसे मेरी हालत का पता लग रहा था वो मुझे इसी लिए और तडपा रही थी | फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों वहा से मेरे घर आ गये मैंने उसे किस करने की कोसिस की तो उसने मना कर दिया उसने मुझ से कहा फोन सेक्स तक तो टीक था पर मैं तुम्हारे साथ सेक्स करके अपने घरवालो को धोखा नहीं देना चाहती मेरे साथ तो खड़े लंड पे धोखा वाली बात हो गयी | मेरा गिरा हुआ चेहरा देख कर उसने मुझ से कहा की पर मैं तुमको किस कर सकती हूँ | मैंने सोंचा की जो मिले वही अच्छा वो मुझे किस करने लगी वो भी मेरे लंड के उभार को अपनी चूत पर महसूस कर रही थी | मैंने गलती से उसके मम्मो को मसल दिया उसने मुझे एक तरफ धक्का दिया और मुझ से नाराज होकर चली गयी | मैं बहुत पछता रहा था की मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी मैंने रात मैं फोन किया सोचा सायद अब वो मुझे माफ़ करदे मेरा फोन तो उठ गया पर सिर्फ उसकी सांसों की आवाज़ आ रही थी मैंने कहा निशा प्लीज मुझे माफ़ कर दो मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है मुझे माफ़ कर दो नहीं तो मैं तुम्हारे बिना नहीं जी पाउँगा | उधर से आवाज़ आयी नहीं मैं तुम्हे नहीं माफ़ कर सकती तुमने ये क्या जादू कर दिया है तुमने जब से तुमको किस किया है और तुम्हारे लंड का स्पर्श हुआ है मैं तब से मेरी चूत में से पानी निकल रहा है क्या कर दिया है तुमने मुझे लगता है की ये अब तुम्हारे लंड लिए बिना नहीं बंद होगा| पर मुझे अब भी विश्वास नहीं हो रहा था | मैंने सोंचा ऐसा तो नहीं है की ये मुझे चेक तो नहीं कर रही | मैंने कहा नहीं ऐसा नहीं हो सकता मैं तुम्हारे साथ ऐसा कैसे कर सकता हूँ कुछ अगर गलत हो गया अगर कुछ गड़बड़ हो गयी तो तुम अपने घर वालों को क्या जवाब दोगी | उसने कहा घर वाले गए तेल लेने मैं अभी आ रही हूँ तुम्हारे पास मैंने कहा तुम पागल हो अब रात के 7 बज चुके है | तुम अपने घर वालों को क्या बताओगी की कहा जा रही हो | उसने कहा मैं बता दूँगी की मेरी सहेली की शादी है वही जा रही हूँ |

कुछ ही पलों मैं मेरे घर की घंटी बजी क्यूंकि उसका घर मेरे घर के नजदीक था | मैंने जाकर दरवाजा खोला और मेरे सामने वो पंजाबी सूट पटियाला सलवार में पहले से भी ज्यादा खूब सूरत लग रही थी और उसके सूट की फिटिंग ऐसी थी जैसे उसकी चूचिया सूट को फाड़ कर बाहर आने को बेताब थी उसका फिगर ऐसा था की उसकी नाभि भी ऊपर से ही महसूस हो रही थी | फिर मैंने उसका स्वागत किया वो अन्दर आ गयी मैं सीधे उसे बेडरूम में ले गया मैंने उससे पानी के लिए पूछा पर उसने मना कर दिया और मेरी तरफ घूरने लगी और उसने मुझे अपनी तरफ खीच लिया और बेड पर गिरा लिया और किस करने लगी | मैं भी उसे जोर से किस करने लगा और हम दोनों बेड पर ऐसे लिपटे पड़े थे जैसे दो साँप आपस मैं लिपटते है | मेरे हाँथ उसकी छाती की ओर बढ़ने लगे और मैं उसके बदन पर हावी हो चुका था | और उसकी तरफ से नाम मात्र का भी विरोध नहीं हो रहा था | मैंने खुद को निशा से अलग किया तो देखा उसके होंठ कांप रहे थे और वो मदहोशी की हालत में कुछ बडबडा रही थी मैंने उसकी दोनों चूचियों पर अपना अधिकार जमा लिया था उसके निप्पल कड़े हो चुके थे अब हम दोनों के बदनो का ताप चरम सीमा पर था अब हमारा रुकना मुस्किल था | मैंने अपना एक हाथ उसकी सलवार हटा के उसके पेट रखा उसके मुह से कंपकपाती सिसकिया निकलने लगी | वो बिना पानी की मछली की तरह तड़प रही थी | मेरा लंड भी अब पैन्ट फाड़कर बाहर आने की कोशिश कर रहा था | दोनों तरफ आग बराबर लगी थी सायद उसमे मेरी सोंच से भी ज्यादा लगी थी | मैंने अपने दोनों हांथों से उसका कुर्ता निकाल कर फेक दिया अब मेरे दोनों हाथ उसके मम्मो को मसल रहे थे उसके निप्पल इतने कड़े हो चुके थे की उन्हें ब्रा के ऊपर से पिया जा सकता था | मैंने ब्रा के उअर से ही उसकी चूचिया चूस कर गीली कर दी | इससे पहले की वो मेरी शर्ट को फाड़ती मैंने अपनी शर्ट निकाल दी मेरे शर्ट निकालते ही उसने मेरी बनयान को फाड़ दिया और भूखी सेरी की तरह मेरे निप्पल चूसने वा काटने लगी | मैंने देर न करते हुए उसकी ब्रा निकाल दी उसके मम्मे मेरी सोंच से भी बड़े थे | मैं फिर से उनको चूसने लगा और उनको चूस कर गुलाबी से लाल कर दिया | मेरे लंड मैं खून का दौरान बहुत तेज था और वो उसकी चूत फाड़ने के लिए बेताब था | मैं धीरे से उसकी नाभि को चूमता हुआ उसकी चूत तक पहुंचा और उसके सलवार का नाडा तोड़ कर उसकी पैंटी उतार दी और उसकी चूत के दानो को अपनी जीभ से सहलाने लगा निशा का पूरा शरीर अकड़ने लगा वो मेरे बालो को खीच कर मुझे अपनी चूत से अलग करना चाहती थी | पर मैं कहा हटने वाला था मैं बराबर उसकी चूत को अपनी जीभ से छोड़ रहा था | उसका शरीर बहुत जोर कांपने लगा और वो झड गयी मैंने उसका सारा रस पी लिया उसकी गुलाबी चूत से क्या खुसबू आ रही थी | अब उसने कह अपना लंड डाल दो मेरी चूत मैं फाड़ दो इसे अब मुझे मत तडपाओ नहीं तो मैं मर जाउंगी अब मैंने अपनी पैन्ट निकाल कर फेंक दी फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पे रगड़ना सुरु किया तो उसके मुह से चीख निकल गयी और फिर मैंने उसकी कमर पकड़ कर एक जोरदार धक्के के साथ अपना आधा लंड उसकी चूत मैं पेल दिया उसकी झिल्ली फट गयी और उसकी चूत से गर्म खून बहने लगा उसकी आंखे बाहर निकल आयी उसकी चीख उसकी खासी में कही खो गयी | उसके दर्द का एहसास उसके गोरे चेहरे से लगाया जा सकता था जो की सुर्ख लाला हो चुका था | उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे | मैंने अपनी होंठों को उसके होंठों पर रख कर धीरे –धीरे किस करना चालू किया और उसके मम्मो को मसलने लगा फिर मैं अपना लंड भी धीरे-धीरे हिलाना चालू किया फिर धीरे से अपना लंड बाहर निकालते हुए एक जोर का धक्का लगाया मरता पूरा लंड उसकी चूत में समा चूका था इस प्रहार से तकरीबन वो बेहोस सी हो गयी उसने की प्रक्रिया नहीं की उसके मुह से झाग निकलने लगा था उसकी मुट्ठियाँ ढीली पड़ गयी थी वो मेरे नीचे मानो लाश की तरह पड़ी थी | ये सब देख कर मेरी गांड फट गयी मैंने जल्दी से पास मैं रखी पानी की बोतल से उसके मुह पर पानी डाला तो उसे कुछ होश आया वो रोने लगी कहने लगी तुमने तो मेरी चूत फाड़ ही डाली कमीने यही प्यार करता है मुझ से तो मैंने बड़े प्यार से उसके माथे को चुमते हुए समझाया की पहली बार ऐसा हर लड़की के साथ होता है | मेरे बहुत समझाने पर वो मानी और फिर मैंने उसे किस करते हुए अपना लंड उसकी चूत धीरे से डालने लगा अब उसका दर्द कम हो चूका था धीरे-धीरे मैंने धक्के बढ़ा दिये अब उसे भी मज़ा आ रहा था वो गांड उचका के मेरा साथ दे रही थी | लगभग 20 मिनट उसे चोदने के बाद हम दोनों झड गए और उस रात मैंने तीन बार चोदा | और उसकी शादी हो चुकी है और वो मेरे बच्चे की माँ बनने वाली है | अब भी जब उसके पति घर नहीं होते हैं मैं उसकी प्यास बुझाने जाया करता हूँ क्यूंकि उसे अब मोटा लंड खाने की आदत पड गयी है उसका पति उसकी प्यास नहीं बुझा पाता है | तो दोस्तों कैसी लगी मेरी कहानी |

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