तीन लौड़ो से आशा के चूत की सामूहिक चुदाई भाग २


उसके इस प्रकार से मेरी चूत को देखने से मुझे शरम आ रही थी और मैंने अपनी चूत को एक हाथ से ढकने की नाकाम कोशिश की.. लेकिन राहुल ने मेरे हाथ को हटाकर शरारत भरी नज़रों से मुझे देखा और अपनी जीभ को बाहर निकलते हुए मेरी चूत के पास ले गया और अब में भी उसे कुछ करते हुए देखना चाहती थी.

तो मैंने देखा कि उसने अपनी जीभ मेरी चूत पर रख दी और अब मेरी आँखो का खुला रह पाना बहुत मुश्किल था. मैंने अपने दोनों पैरो को फैला दिया और उसने अपने होंठो को मेरी चूत के होंठो पर रखकर जीभ से मेरी चूत को सहलना और चूसना शुरू कर दिया और में मचलने लगी थी.

अब मेरे आस पास क्या हो रहा है.. इस बात की मुझे कोई खबर नहीं थी और में सिर्फ़ उस मज़े को ले रही थी जो मुझे चूत से मिल रहा था. आआआहह उफ़फ्फ़ राहुल आईईईईईईई की आवाज़े जाने कहाँ से मेरे मुहं से निकलने लगी थी और उसकी जीभ जब मेरी चूत के अंदर जाती.. तो मेरी एकदम से खुमारी बड़ जाती

मेरे लिए अब अपनी आँखें खुली रख पाना बहुत मुश्किल हो रहा था. तो मैंने आँखें बंद कर ली और उसको अपनी चूत के साथ खेलने की पूरी छूट दे दी.तो वो अब मेरी चूत को बहुत अच्छी तरह से चाट रहा था और मेरी कमर अपने आप मटकने लगी थी और मेरा मन यह कर रहा था कि वो अब मुझे जल्दी से चोद दे.. लेकिन पता नहीं क्यों उसे मेरी चूत को चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था और मैंने उसके सर के बालों को सहलाते हुए पकड़ा और उसे ऊपर की और ध्यान देने का इशारा किया.

उसने सीधे खड़े होकर मेरी कमर में अपना हाथ डाला और अपनी और खींच लिया. में उससे एकदम चिपक गई और उसने अब मेरे बदन पर चुम्बनों की बारिश कर दी.. मेरे हाथों पर, गालों पर, गले पर, बूब्स पर, हर जगह पर वो बस चूम रहा था और में उसकी आगोश में अपने आप को पिघलता हुआ सा महसूस कर रही थी.

उसने मेरे हर अंग को छूना और चूमना शुरू कर दिया था और मेरे बूब्स को तो वो दोनों हाथों से दबा भी रहा था और एक एक बूब्स को बारी बारी से चूस भी रहा था. तो मेरे बूब्स एकदम लाल होने लगे थे उनके निप्पल पर जब वो अपनी जीभ लगाता तो मेरी चूत में एक करंट सा लगता

में पूरी तरह से गुम हो गई थी. अब मैंने भी उसके कपड़े भी उतारना शुरू कर दिया.. उसके सुडौल जिस्म से जैसे जैसे में कपड़े उतार रही थी.. मुझे उससे चुदने का मन और कर रहा था और मैंने जब उसका लंड देखा तो में मचल गई. उसका बहुत बड़ा और मोटा सा लंड था. फिर मैंने राहुल की और देखा तो वो मुझे देखकर मुस्कुरा रहा था और में एकदम से शरमा गई और मैंने किचन की उस ऊंचाई पर ठीक से अपने पैरों को खोल दिया..

जैसे कि में उसको अपनी और आकर्षित कर रही थी कि आओ और मुझे चोद दो और फिर उसने ऐसा ही किया. उसने मेरे दोनों पैरों को अपने हाथों में लेते ही मुझे हल्का सा पीछे की और किया.. जिससे मेरी चूत उसके लंड की सीध में आ गया और उसने अपने लंड को किचन में रखे हुए तेल से हल्का सा चिकना किया और मेरी चूत के पास वापस लौट आया और मेरे पैरों को हल्का सा उठाकर मेरी चूत पर अपने लंड को टिका दिया.

मैंने अपने हाथ से पीछे की दीवार का सहारा ले लिया था.. मुझे यह तो अनुमान हो गया था कि अब राहुल मेरी चूत में अपने लंड को घुसाने वाला है और फिर उसने वही किया.. उसने मेरी चूत पर अपने लंड को टिकाकर मेरे कंधो को अपने हाथों से पकड़ा और एक धक्का मार दिया. तो अब मेरी तो एकदम जान सी निकल गई.. क्योंकि मेरी चूत की सील अभी तक नहीं टूटी थी और इसलिए लंड अंदर नहीं जा पाया और मेरी चूत के दर्द से में कराह उठी.

तो मैंने राहुल को मना किया कि प्लीज आज नहीं फिर कभी.. लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी और उसने मेरी चूत पर टिके लंड को कसकर अंदर धक्का दिया और मुझे बहुत तेज़ दर्द हुआ आआआईईईईईईई उफफफफ.. मेरे मुहं से यह आवाज़ जाने कहाँ से निकलने लगी और जब मैंने आँखें खोलकर देखा तो मेरी चूत में राहुल का आधा लंड जा चुका था और में कहने लगी राहुल प्लीज अब इसे बाहर निकाल लो..

में तुमसे बाद में करवा लूंगी प्लीज.. लेकिन मेरी बातों का तो उस पर कोई असर ही नहीं हो रहा था. तो उसने एक और करारा धक्का मार दिया आअहह उह्ह्ह और अब उसका पूरा लंड मेरी चूत के अंदर था और उसकी साँसे मेरे चेहरे पर पड़ रही थी. तो में उसकी खुश्बू भी सूंघ सकती थी और अब में उसकी हो गई थी..

में उससे लिपट गई और उसने मुझे चोदना शुरू कर दिया.. मेरी चूत पर उसका लंड अब धक्के पे धक्के मार रहा था और धीरे धीरे लंड मेरी चूत की दीवारों पर रगड़ बनाता हुआ मुझे चोद रहा था और मेरी पूरी चूत उसके लंड की रगड़ से दर्द मचा रही थी.. लेकिन मेरी खुजली भी कम हो रही थी. अब तो में भी अपनी कमर को उछालकर उसके लंड को अपने अंदर समा लेना चाहती थी और उसका लंड मेरी चूत में उथल पुथल मचा रहा था.

फिर थोड़ी ही देर बाद हम दोनों ही झड़ गए.. उसका वीर्य मेरी चूत में ही निकल गया और वो मुझे अभी भी प्यार कर रहा था. मेरे बूब्स को हाथों से सहलाते हुआ मुझे चूम रहा था और में पूरी तरह से राहुल की हो गई थी.. लेकिन राहुल के दिमाग़ में कुछ और ही चल रहा था और उसने मुझे किचन में ही दो बार चोदा और फिर एक बार गांड मारकर चला गया और मुझसे रोज़ चुदवाने का वादा लिया और फिर उसी रात को मुझे वो अपने रूम पर बुलाकर ले गया..

मेरे ऊपर उसका नशा ऐसा सवार था कि मैंने उससे वादा भी कर लिया कि में उससे चुदवाने उसके कमरे में आ जाउंगी और जब रात हुई तो में अपने छोटे भाई को सुलाकर राहुल के रूम की और जाने की सोचने लगी और मैंने अपनी मेक्सी निकाली जो नीले कलर की है उसे में अक्सर पहन लेती हूँ.. लेकिन आज मैंने उसे बिना ब्रा और पेंटी के पहना था.. क्योंकि उसे मेरे बूब्स और चूत दोनों के दर्शन बाहर से ही हो जाते. तो में चाह रही थी कि राहुल मुझे देखते ही उत्तेजित हो जाए..

यह सब सोचते ही में राहुल के कमरे की और बड़ गई और जब में उसके कमरे पर पहुँची तो वो मेरा ही इंतजार कर रहा था. में उसके पास पूरी तरह सेक्सी बनकर गई थी.. क्योंकि दिन की चुदाई के बाद मेरी कामुकता बहुत बड़ गई थी और मेरी चूत यह सोच सोचकर पानी छोड़ रही थी कि में अभी कुछ देर में ही राहुल से दोबारा चुदने वाली हूँ.

फिर मैंने उसकी तरफ देखा और मेरा शरम के मारे बहुत बुरा हाल था. वो अपने बेड पर बैठा मुझे निहार रहा था.. मैंने नजरे चुराकर उसको देखा तो उसकी नज़र मेरे बूब्स पर थी और मेरी मेक्सी थोड़ी छोटी है तो मेरी गोरी गोरी नंगी जांघे उसको नज़र आ रही थी और मैंने आने से पहले अपने आप को एक बार कांच में देखा था..

में किसी सेक्सी फिल्म की हिरोईन लग रही थी. फिर उसने मुझे बुलाकर अपने पास बैठा लिया और बातें करने लगा.. लेकिन उसके हाथ मेरी जांघो पर, कभी बूब्स पर घूम रहे थे. उसने धीमे धीमे मेरी मेक्सी को उतारना शुरू कर दिया और एक एक बटन खोलकर उसने मेरी मेक्सी को एक तरफ हटा दिया. में अब बिल्कुल नंगी बैठी.. उससे बातें करने लगी. में अब थोड़ा कम शरमा रही थी और वो मेरे बूब्स को हाथों में लेकर धीमे धीमे खेल रहा था और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था.

तभी मुझे कुछ और अहसास हुआ और मेरी पीठ पर किसी और के हाथ भी चल रहे थे और जब मैंने घबराकर पीछे देखा तो वो अमित था और उसका एक और दोस्त भी वहाँ पर उपस्थित था. तो में बहुत घबरा गई और मैंने कहा कि राहुल यह सब क्या है? तो वो बोला कि कुछ नहीं है..

आशा देखो यह भी तुमको बहुत चाहता है और मुझसे कह रहा था कि मुझे भी एक बार आशा के साथ सेक्स करना है और मैंने उसको बता दिया कि तुम आज रात मुझसे चुदने आ रही हो. हाँ तो वो सब ठीक है.. लेकिन यह दूसरा कौन है? तो वो बोला कि यह अमित का दोस्त है और यह भी तुमको चोदना चाहता है. तो मैंने गुस्से में कहा कि राहुल क्या तुमने मुझे सबका सामान समझ रखा है कि कोई भी आएगा और में तुम्हारे कमरे पर आकर अपनी चुदाई करवा लूंगी.

फिर वो बोला कि अरे नहीं यार.. देखो एक बार चुदी या बार बार क्या फर्क पड़ता है.. तुम्हारी सील तो मैंने तोड़ दी है तो अब कितनी बार लंड अंदर गया.. किसी को क्या फर्क पड़ रहा है. तो मैंने उससे कहा कि नहीं राहुल में इन लोगों से नहीं करवा सकती. फिर वो बोला कि सुनो सुनो में एक बात कहता हूँ.. तुम सिर्फ एक बार करके देख लो अगर मज़ा आय तो करना वरना दोबारा मत करना.

मैंने कहा कि ठीक है और फिर मैंने भी सोचा कि वैसे भी में आई भी तो चुदवाने ही थी और अगर यह लोग भी अगर एक बार मुझे चोद लेंगे तो क्या फर्क पड़ेगा और मैंने हाँ में सर हिला दिया. फिर तो जैसे अमित और उसके उस दोस्त की तो निकल पड़ी.. वो दोनों खुशी खुशी मुझे घेरकर बैठ गए और मज़े की बातें करते हुए मुझे यहाँ वहाँ छूने लगे और में उन तीनों के बीच एकदम नंगी बैठी हुई थी.

तभी अमित ने टीवी, सीडी प्लेयर पर एक सीडी लगा दी और हम लोग वो देखने लगे.. क्योंकि उसमे एक पॉर्न फिल्म चल थी.. जिसमे एक आदमी दो लड़कियों कि एक साथ चुदाई कर रहा था और जब वो फिल्म खत्म हुई तो दूसरी फिल्म शुरू हुई.

उसमे एक लड़की तीन मर्दों से चुदवा रही थी और पूरे पूरे लंड को अपने मुहं में ले रही थी और दो मर्द उसकी गांड और चूत दोनों में अपने लंड को डालकर चोद रहे थे. फिर यह सब देखकर मेरी चूत तो पानी छोड़ने लगी और शायद अब उन लोगों का भी मूड बनने लगा था. तो उन तीनों ने अपनी अपनी पेंट उतार फेंकी और मेरे सामने आ गए.. जिस प्रकार पॉर्न फिल्म में वो लड़की उन मर्दों का लंड चूस रही थी

 

(TBC)…


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