निधि न सही सुहाना के साथ ही रात रंगीन हुई


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मेरे ही ऑफिस में काम करने वाली नाम सुहाना । हम दोनों हम उम्र हैं इसलिये एक दूसरे से कई प्रकार के मजाक भी कर लेती थी । उसने बहुत बार मुझे अपने घर चलने को कहा और एक दिन मैं ऑफिस के बाद उसके घर चली गई । उसके मम्मी पापा ने मेरा बहुत सत्कार किया और बहुत आदर मान से रात को उनके यहाँ रुकने को कहा । मैं उनका आग्रह टाल नहीं सकी और मैंने निधि को फोन करके बता दिया कि मैं रात को अपनी दोस्त सुहाना के घर पर रुकूँगी । रात को खाना खाने के बाद हम दोनों सुहाना के कमरे में चली गईं । सुहाना ने मुझे अपनी एक टी-शर्ट और पायजामा दिया तो मैंने सिर्फ टी-शर्ट पहन ली और अपनी पैंटी में ही उसके साथ बिस्तर में घुस गई और हम दोनों बातें करने लगी । बातों बातों में सुहाना मुझसे लड़कों के साथ चुदाई के बारे में बातें करने लगी । हम दोनों ऑफिस के लड़कों और दूसरे लड़कों के बारे में बातें करते रहे । मैंने उसे निधि के साथ अपने सेक्स के बारे में बता दिया और यह भी बताया कि किस प्रकार हम दोनों बहुत बार एक ही लड़के के साथ चुदाई करती हैं । सुहाना मुझे सैक्स के बारे में लगातार छेड़ रही थी और मेरी जांघ को सहला रही थी । मैं उत्तेजित होने लगी और लड़के के लंड के बारे में सोचने लगी ।

कुछ देर बाद हम दोनों लेट गईं तो मैंने देखा कि सुहाना भी गहरी साँसें ले रही थी और उसके दूध उसके साँस लेने से ऊपर नीचे हो रहे थे । मेरा दिल किया कि उनको दबा दूँ पर आज से पहले तक हम दोनों के बीच में कभी कोई ऐसी बातचीत नहीं हुई थी बस हँसी मजाक ही हुआ था | मैंने भी करवट लेकर उसकी ओर मुँह कर लिया और अब हम दोनों के चेहरे आमने सामने थे । सुहाना ने अपनी एक बाँह मेरी गर्दन के नीचे डालने की कोशिश की तो मैंने अपनी गर्दन थोड़ी सी उठा कर उसको अपनी बाँह मेरी गर्दन के नीचे डालने की जगह देदी । मैंने अपनी गर्दन उसकी बाँह पर रख दी और अपनी दूसरी बाँह उसके ऊपर लपेट कर उसके थोड़ा और पास हो गई ।

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मैंने धीरे से सुहाना के चेहरे को चूम लिया | अचानक मुझे निधि की याद आ गई और मैंने एक बार फिर से सुहाना को चूम लिया । फिर मुझे लगा कि शायद मैंने यह ठीक नहीं किया और तभी सुहाना ने मेरा सिर अपने और पास करने की कोशिश की । एक बार मुझे लगा कि शायद सुहाना भी यही चाहती है और मैंने उसे फिर से चूम लिया । सुहाना ने अपनी आँखें खोल लीं और मुझे होंठों पर चूम लिया । मेरी एक हल्की सी आह निकली और मेरा दिल जोर से धड़कने लगा । सुहाना ने अपना चेहरा मेरे और पास किया और मेरे होठों को चूसने लगी । फिर उसने मुझे इशारे से अपने ऊपर आने को कहा । मैं उसके ऊपर आ गई और अपनी चूत को सुहाना की चूत पर दबाने लगी । मैं अपना चेहरा थोड़ा नीचे कर के बिल्कुल सुहाना के चेहरे के सामने ले आई और उसकी आँखों में देखने लगी । मैं सुहाना के होठों के आस पास चाटने लगी और उसके होठों को हल्के हल्के काटती हुई उसके होंठों को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगी । मैंने थोड़ा ऊपर हो कर अपनी टी-शर्ट उतार दी तो सुहाना ने अपने हाथ मेरे पीछे कर के मेरी ब्रा के हुक खोल दिये और मैंने उसे उतार कर फ़ेंक दिया । सुहाना ने मेरी गांड पर हाथ फेरते हुए मेरी पैंटी भी नीचे कर दी तो मैंने उसे भी उतार दिया और फिर से सुहाना के होठों को चूसने लगी । हम दोनों पलटी  और मैंने सुहाना के कपड़े भी उतार दिये और उसको फिर से नीचे लिटा कर उसके ऊपर चढ़ गई और अपनी चूत से उसकी चूत पर धक्के देने लगी । सुहाना ने मेरे एक निप्पलस को अपनी उंगली से दबा दिया । मैं जोर से चीखी तो सुहाना हँस कर कहने लगी प्रीता तुझे ऐसे मज़ा आता है तो मैंने हाँ में सिर हिलाया तो उसने दोबारा मेरे निप्पलस दबा दिये । तेरी चूत तो बहुत गरम हो गई है | तेरी चूत के पानी से मेरी चूत गीली हो रही है | मुझे पता है कि अब तेरा दिल चुदाई का कर रहा है कहते हुए सुहाना ने मुझे नीचे किया और मेरे ऊपर आकर मुझे चूमने लगी । सुहाना अपने दोंनों हाथों से मेरे दूध दबा रही थी । मेरी चूत बहुत गीली थी और मैं एक हाथ से सुहाना के बालों को सहलाते हुए दूसरे हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी । सुहाना धीरे-धीरे अपना मुँह मेरे दूध तक ले गई और उन पर टूट पड़ी प्रीता तेरे मोम्मे कितने बड़े हैं | मोटे मोटे गद्दे जैसे | लड़कों को इनको चोदने में मज़ा आता होगा न सुहाना का पूरा ध्यान मेरे मोम्मों पर था और मेरी सिसकारियाँ निकल रहीं थीं आह्ह| वंशिका चूस और जोर से चूस मेरे दूध | काट ले इनको और सुहाना मेरे दूध को और जोर से दबाने और चूस कर काटने लगी । मैंने अपने दोनों हाथों से सुहाना की गांड को दबाना शुरू कर दिया ।

धीरे से मैंने अपना एक हाथ सुहाना की चूत पर रखा और उसकी चूत को सहलाने लगी । उसकी चूत भी बहुत गीली थी । मैं अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल कर हिलाने लगी । सुहाना मेरे ऊपर से उतर कर मेरे साथ लेट गई और उसने भी मेरी चूत में अपनी एक उंगली डाल दी । मैंने धीरे से अपनी दूसरी उंगली भी सुहाना की चूत में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगी । सुहाना ने अपनी उंगली मेरी चूत से निकाल कर मेरे बालों को खींचते हुए मेरे होंठों को जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया तो मैं समझ गई कि अब वो मस्त हो गई है । मैं अपनी उँगलियों को उसकी चूत के अंदर-बाहर करने की गति धीरे धीरे बढ़ाने लगी । जैसे जैसे मेरे हाथ की गति बढ़ती सुहाना की सिसकारियों की आवाज़ भी उतनी जोर से आती । मैं धीरे धीरे उसके चेहरे गर्दन और दूध चूमती हुई उसके पेट से होते हुए नीचे तक आकर ठीक उसकी चूत के कुछ ऊपर उसको चूमने लगी । मैंने उसकी चूत को उँगलियों से चोदने की गति बढ़ाई और साथ ही उसकी चूत को जोर जोर से चाटने लगी । सुहाना ने मेरे सिर को अपनी जांघों में दबा रखा था और दबी आवाज़ में जोर जोर से साँसें भर रही थी । तभी सुहाना झड़ गई और अपना सिर इधर उधर हिलाते हुए ओह आह की आवाजें निकालने लगी ।

 

मैंने अपनी उँगलियाँ बाहर नहीं निकालीं और उसकी चूत को चाट चाट कर साफ़ करने लगी । जब उसका झड़ना शांत हो गया तो वो मेरा सिर पकड़ कर ऊपर खींचने लगी । मैं उसके शरीर को अब नीचे से ऊपर की ओर चूमती हुई उसके चेहरे पर पहुँच गई और उसके होंठों को चूम | सुहाना अपनी साँसें तेज होने के बाद मेरा चेहरा चाटने लगी और धीरे धीरे मेरे नीचे की ओर जाने लगी । मेरी गांड अपने दोनों हाथों से दबाते हुए दूध तक पहुँच कर उनको चूसने लगी । उसने मेरे चुचूक काटने शुरू कर दिये । फिर नीचे आते आते वो मेरे पेट को चाटती हुई मेरी चूत तक पहुँच गई और मेरी जांघों को चाटने लगी । मैं अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए अपनी चूत को उसके मुँह पर मारने लगी । सुहाना मेरी चूत से लेकर मेरी गाण्ड के छेद तक चाटने लगी और फिर उसने भी अपनी दो उँगलियाँ मेरी चूत में डाल दीं और उन्हें मेरी चूत के अंदर-बाहर करने लगी । कुछ देर वहाँ चाटने के बाद सुहाना ने मुझे घोड़ी की तरह बनने को कहा ।

 

मैं घोड़ी बन गई तो सुहाना पीछे से मेरी चूत में अपनी उँगलियाँ डाल कर मेरी गांड को चाटने लगी । मैं अपनी गांड को कभी आगे पीछे और कभी ऊपर नीचे कर रही थी । सुहाना ने अपना मुँह मेरे नीचे कर के अपनी उँगलियों से मेरी चूत को चोदते हुए मेरी जांघों को चाटना शुरू कर दिय। आह्ह आह्ह सुहाना | मेरी आहें निकल रहीं थीं वंशिका  तू यह क्या जादू कर रही है |  मैं अपनी सांस संयत रखने की कोशिश कर रही थी । वंशिका  प्लीज़ | अब बस कर मैं झड़ने वाली हूँ | झड़ जा प्रीता मेरी जान | आज इतनी जोर से झड़ जा ताकि तुझे झड़ने का मज़ा आ जाए | सुहाना कहने लगी । मेरी आँखें आनंद और उन्माद से पूरी खुली हुई थीं । मैं जोर जोर से अपनी गांड को आगे-पीछे कर रही थी । मेरी गाण्ड का छेद खुल और बंद हो रहा था और मेरा दिल कर रहा था कि इस समय कोई लड़का अपना लंड मेरी गांड में घुसेड़ दे । आह्हह्ह  ओह्ह्ह्ह सुहाना | मैंने अपना मुँह तकिये में दबा लिया ताकि मेरी चीख की आवाज़ बाहर ना जाए । परंतु सुहाना मेरी जांघों को सहलाते हुए मुझे उँगलियों से चोदती रही और मैं झड़ने लगी । मेरा पानी मेरी चूत से निकल कर सुहाना के हाथों को भीग रहा था और नीचे बिस्तर पर गिर रहा था । थोड़ी देर के बाद मैं वैसे ही बिस्तर पर गिर गई और जोर जोर से हांफने लगी । सुहाना मेरे ऊपर लेट कर मुझे चूमते हुए कहने लगी शालू अब किसी दिन दोनों मिल कर लड़कों के साथ मज़ा करते हैं |