नौकरी या चुदाई


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मेरा नाम आयुष है और मैं रोहतक का रहने वाला हूं। मैं बचपन से पढ़ने में बहुत अच्छा हूं और मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं किसी अच्छी जगह पढ़ाई करूं इसके लिए उन्होंने मुझे कहा कि तुम पढ़ने के लिए पुणे चले जाओ। पुणे में तुम्हारी बहुत ही अच्छी पढ़ाई हो पाएगी और तुम घर से दूर हो गए तो तुम पढ़ाई में अपना ध्यान भी दे पाओगे। रोहतक में मेरे जितने भी दोस्त है वह बहुत ही बर्बाद थे। वह बिल्कुल भी पढ़ने में सही नहीं थे और जब भी उनसे पढ़ाई की बात होती तो वो बात को टाल दिया करते थे। इस वजह से मेरे घरवाले उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे। जब भी मेरे दोस्त मेरे घर पर आते तो मेरे पिताजी बहुत ही गुस्सा हो जाते हैं और वह कहते कि यदि तुम इन लोगों की संगत में रहोगे तो तुम बहुत बिगड़ जाओगे। मेरे पिताजी ने कई बार उन्हें सिगरेट और शराब पीते हुए देख लिया था। इस वजह से वह उन्हें बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर सकते थे और वह कहने लगे कि तुम उनसे जितना दूर रहो उतना ही अच्छा रहेगा। मैं नहीं चाहता कि तुम भी उनके जैसे बनो और अपना भविष्य खराब कर लो। मैं तुम्हें एक सफल व्यक्ति होता हुआ देखना चाहता हूं।

मैंने उनकी बात मान लिया और उनसे कहा कि ठीक है मैं पुणे चला जाऊंगा। मैंने वहीं पर एडमिशन ले लिया और अब मैं पुणे में ही पढ़ाई करने लगा। जब मैं कॉलेज जाता तो कॉलेज में मुझे बहुत ही अच्छा लगता था। क्योंकि वहां पर मेरे बहुत सारे दोस्त बन चुके थे और अब मुझे काफी समय भी हो चुका था कॉलेज जाते हुए। जिस वजह से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी थी। हमारे कॉलेज में ज्यादातर लड़के पढ़ने वाले थे और वह सिर्फ पढ़ाई पर ही ध्यान देते थे और मेरा ग्रुप बहुत ही अच्छा था। वह सब पढ़ाई में बहुत ही ध्यान दिया करते थे। हम लोग सिर्फ पढ़ाई की बातें किया करते थे और अपने भविष्य में कुछ अच्छा करने को लेकर बात करते थे। मैंने जहां पर रहने के लिए लिया था वहां से मुझे कॉलेज आने में बहुत दिक्कत होती थी। इसलिए मैं सोचने लगा कि मैं कहीं कॉलेज के आस पास ही कोई रहने के लिए घर देख लेता हूं। मेरे जितने भी कॉलेज के दोस्त थे मैंने उनसे बात की और उन्होंने मेरे लिए कॉलेज के पास में ही एक घर देख लिया और अब मैं वहीं पर शिफ्ट हो गया। मैं जब वहां से कॉलेज आता था तो मैं बहुत ही जल्दी पहुंच जाता था। क्योंकि वहां से मेरा कॉलेज सिर्फ 5 मिनट की दूरी पर था और मैं जहां रहता था वहां से मेरा कॉलेज दिखाई देता था। रात को जब मैं छत में बैठा होता था तो मैं अपने कॉलेज की तरफ ही देखा करता था।

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मैं अक्सर बैठकर फोन पर बातें किया करता था या फिर फोन पर गेम खेल लिया करता। एक दिन मैं अपनी छत में बैठा हुआ था तो मुझे सामने ही एक लड़की दिखाई दी। उसका चेहरा मुझे साफ नहीं दिखाई दे रहा था लेकिन वह बहुत ही अच्छी लग रही थी। उसके बाल खुले नजर आ रहे थे और दूर से वह बहुत ही सुंदर लग रही थी। मैंने उसे देखने की बहुत कोशिश की परंतु मुझे साफ नहीं दिखाई दे रहा था। क्योंकि अंधेरा बहुत हो गया था। मैं अगले दिन भी छत पर बैठा हुआ था तो वो लड़की मुझे दोबारा से दिखाई दी गई। उस दिन इतना ज्यादा अंधेरा नहीं था और जब मैंने उसे देखा तो वह बहुत सुंदर और अच्छी लग रही थी। मैंने सोचा कि अब मुझे उससे बात करनी चाहिए। मैं जब भी कॉलेज से आता हूं तो तुरंत ही छत पर पहुंच जाता। जब भी मुझे वह दिखती तो मैं उसे बहुत ज्यादा घूर कर देखा करता था। अब वह भी मुझे अपनी छत से देखने लगी। हम दोनों की इशारों इशारों में बात होने लगी और मुझे ऐसा लगने लगा कि शायद वह भी मेरी तरफ आकर्षित हो चुकी है और मैं सोचने लगा कि मैं उससे कैसे बात करूं।

एक दिन मैंने अपने कागज पर अपना नंबर लिख दिया और उसकी छत पर फेंक दिया। उसने फोन नंबर उठाया और उसके बाद वह मुझे फोन करने लगी। जब उसने मुझे पहली बार फोन किया तो मुझे उसकी आवाज सुनकर बहुत ही अच्छा लगा और मैंने उससे उसका नाम पूछा। उसका नाम सपना था और मुझे उससे बात कर के बहुत ही अच्छा लग रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं उससे बात करता ही रहूं। मैं बहुत ही खुश था सपना से बात कर के। वह भी बहुत ज्यादा खुश थी लेकिन मैंने उसे फोन पर प्रपोज नहीं किया था और हम लोग सिर्फ छत से ही एक दूसरे को देखा करते थे। एक दिन मैंने उसे फोन में कहा कि यदि तुम्हारे पास समय हो तो तुम मेरे साथ कहीं घूमने चल सकती हो। मैंने उसे बताया कि मैं पुणे में नया आया हूं और मैं ज्यादा नहीं जानता कि कहां पर घूमने की जगह है। वह कहने लगी कि मैं तुम्हें पुणे घुमा दूंगी। जब वह मुझे पहली बार दिखी तो मैं उसे देखता ही रह गया। उसने पटियाला सूट पहना हुआ था और वह दिखने में बहुत ही सुंदर थी। उसका रंग बहुत ज्यादा गोरा और साफ था। जब वह मुझे मिली तो मैंने उससे हाथ मिलाया। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। जब मैं उससे हाथ मिला रहा था। अब हम दोनों घूमने चले गए। जब मैं उसके साथ घूम रहा था तो मैं उसका हाथ पकड़ लेता और वह भी मेरे हाथों में अपना हाथ डाल देती। मुझे उसके साथ घूमना बहुत ही अच्छा लग रहा था। जब हम लोग घूम कर वापस लौटे तो वह बहुत ही खुश नजर आ रही थी और मैं भी बहुत खुश था। अब मैंने उसे कहा कि मैं तुमसे फोन पर बात करता हूं। उसके बाद मैं अपने घर पर आ गया और अब मेरी अक्सर सपना से बात हो जाया करती थी और वह मुझे मिल जाती थी।

एक दिन मेरे मकान मालिक कहीं गए हुए थे तो मैंने उस दिन सपना को अपने घर पर बुला लिया। जब वह मेरे घर पर आई तो उसने बहुत ही टाइट जींस पहनी हुई थी जिसमें कि उसकी गांड के ऊभार साफ साफ दिखाई दे रहे थे और उसके स्तन उसकी टीशर्ट से बाहर झाक रहे थे। वह जब मेरे पास आकर बैठे तो मैने तुरंत ही उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसे कस कर दबा दिया। मैं उसे इतनी तेजी से दबा रहा था कि वह हिल भी नहीं पा रही थी और मैं उसके स्तनों को बड़े ही अच्छे से दबाता जा रहा था। उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मैं उसके स्तनों को दबाता। उसने अपने शरीर को मेरे आगे समर्पित कर दिया था। जब मैंने उसके कपड़े उतारे तो उसने पिंक कलर की पैंटी ब्रा पहनी हुई थी। मैंने उसकी पैंटी को उतार दिया उसकी चूत मे एक भी बाल नहीं था। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया वह पूरे मूड में आ चुकी थी। मैं भी मूड में आ गया और मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू कर दिया। मैने उसके स्तनों को अपने मुंह में समा लिया और उसे बहुत ही अच्छे से चूसने लगा  मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था और मेरे अंदर की उत्तेजना भी बढ़ चुकी थी। मैंने अपने बिस्तर पर उसे लेटा दिया मैंने उसकी चूत मे अपने लंड को डाल दिया मुझे ऐसा लगा कि उसकी चूत बहुत ही टाइट है। वह अपन मुह से आवाज निकाल रही थी मैं उसे बड़ी तेजी से झटके मारता जाता उसे बडा  मजा आ रहा था। वह मुझे कहने लगी तुम मुझे बहुत अच्छे से चोद रहे हो। उसकी योनि से खून भी निकल रहा था और मेरा लंड भी पूरी तरीके से छिल चुका था। मैंने उसे बहुत तेज तेज झटके मारने शुरू कर दिए और उसने अपने दोनों पैरों को बहुत चौडा कर लिया था ताकी मेरा लंड उसकी योनि के अंदर आसानी से जा सके। मैं उसे ऐसे ही बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था उसका शरीर गर्म हो चुका था और उसके शरीर से पसीना निकल रहा था। जब उसका शरीर इतना गर्म हो गया कि उसकी योनि से बहुत ही तेजी से पानी निकालने लगा। कुछ देर बाद वह झड़ गई तो उसने अपनी चूत को कुछ ज्यादा ही टाइट कर लिया और मेरा लंड बड़ी मुश्किल से उसकी योनि के अंदर जा रहा था। फिर भी मैं उसे धक्के मार रहा था उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर आने लगी मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर ही गिर गया। उसे बहुत अच्छा लगा जब मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर ही जा गिरा और अब हम दोनों साथ में सेक्स कर लिया करते हैं।