नसीहत नहीं लंड चाहिए साहब


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मेरा नाम रोशन है। मैं 25 वर्ष का युवा हूं और मैं गोवा में रहता हूं। मैं अपने छोटे मोटे काम कर के गुजारा कर लिया करता था। कभी किसी की दुकान में काम कर लेता था तो वह मुझे उसके बदले पैसे दे दिया करता था और मेरा समय ऐसे ही चल रहा था। परंतु मुझे लगने लगा था कि मुझे कोई एक काम पकड़ लेना चाहिए जिससे कि मेरे पास पैसा आते रहे। मैं सोचने लगा कि क्यों ना मैं गाड़ी चलाना सीख लूं और उसके बाद कहीं नौकरी कर लू। मैं अब ड्राइविंग स्कूल में चला गया और वहां पर मैंने कार चलाने की ट्रेनिंग ली। कुछ समय बाद मैं कार चलाना सीख चुका था और अब मैं अपने लिए नौकरी देखने लगा। मुझे एक ट्रैवल कंपनी में नौकरी मिली थी और वहां पर मुझे अच्छी तनख्वाह भी मिलती थी। जितने भी सवारियां यहां पर घूमने आती थी उन्हें मुझे एयरपोर्ट तक या फिर रेलवे स्टेशन तक छोड़ ना होता था और कभी कोई हमारी गाड़ी बुक कर लिया करता तो मुझे उन्हें गोवा घुमाना पड़ता था। मेरे समय ऐसे ही बीत रहा था और मैं अपने दोस्तों के साथ बहुत ही इंजॉय करता था। सुबह अपना काम करने के बाद जब मैं शाम को लौटता तो उनके साथ मैं शराब पीने के लिए चला जाता था और उनके साथ जमकर मस्ती किया करता था। वह लोग भी बहुत ही अच्छे हैं और बहुत ही खुश दिल है। वह बहुत ही मजाक मस्ती किया करते थे। मुझे ऐसा लगता था कि मुझे उन्हीं के साथ रहना चाहिए लेकिन मुझे अपने घर का खर्चा उठाना था और कुछ करना था इसलिए मुझे गाड़ी चलानी पड़ती थी।

जब मुझे काफी समय बीत चुका था गाड़ी चलाते हुए तो अब मुझे लगने लगा था कि मुझे अपनी खुद की ही एक गाड़ी ले लेनी चाहिए। जिससे कि मुझे अच्छी आमदनी हो जाया करेगी लेकिन यहां सिर्फ मैं सपना ही देख सकता था। क्योंकि मेरे पास पैसे नहीं थे और मैं अपनी गाड़ी खरीद नहीं सकता था। इस वजह से मुझे नौकरी ही करनी थी लेकिन मेरे दिमाग में यह सब चल रहा था कि मुझे अपने लिए खुद की एक ट्रैवल एजेंसी खोलनी हैं और उसमें मैं अपनी गाड़ियां रखूंगा। अब मैं ऐसे ही काम कर रहा था और मेरा समय बीतता जा रहा था। मैं रोज नए नए लोगो को कभी एयरपोर्ट छोड़ने जाता और कभी रेलवे स्टेशन लेने जाया करता था। मेरे घर में मेरी मां मुझसे बहुत खुश थी और वह कहती है कि तुम अब बहुत ज्यादा मेहनत कर रहे हो और वह कहने लगी कि मुझे लगता है तुम्हें अब जिम्मेदारी का एहसास होने लगा है। मैंने अपनी मां से कहा कि जिम्मेदारी का एहसास तो एक न एक दिन हो ही जाता है। जिस दिन मुझे लगा कि मुझे अब काम करना चाहिए तो उस दिन से मैं काम करने लगा हूं। एक बार मुझे किसी को गोवा घुमाना था। मेरे मालिक ने कहा कि तुम एक काम करो तुम उन्हें होटल से रिसीव कर लो और वहां से उन्हें गोवा घुमाना। तुम उनके साथ 3 दिन तक रहोगे। जब मैं होटल गया तो मैंने देखा कि वह एक फैमिली है उसमे वह चार लोग थे। मैंने जब उस लड़की को देखा तो वह मेरी नजरों से हट ही नहीं रही थी। वह बहुत ज्यादा सुंदर थी और मैं उसे देखे जा रहा था। अब वह लोग मेरी कार में बैठ गए और जब उन्होंने मुझसे मेरा नाम पूछा तो मैंने उन्हें नाम बता दिया और उन्हें अब मैं गोवा घुमाने के लिए अपने साथ ले गया।

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मैं उन्हें गोवा घुमा रहा था और वह लोग बहुत ही खुश नजर आ रहे थे। मैंने जब उस व्यक्ति से पूछा कि आप क्या करते हैं तो वह कहने लगा कि मैं एक डॉक्टर हूं और यह मेरी फैमिली है। उसने मुझे सबसे परिचय करवाया। उनकी लड़की का नाम आशा था और जब मैं आशा से बात कर रहा था तो वह भी मुझसे बहुत बातें किया करती थी। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था उससे बात करना। अब वह मुझसे हर बार पूछा करती कि यह कौन सी जगह है। मैं उसे सब जगह बताता रहता। पहले दिन मैंने उन्हें बहुत अच्छे से घुमाया और अब उनके होटल में छोड़ दिया। जब मैंने उन्हें होटल में छोड़ा तो आशा ने मेरा नंबर ले लिया और वो कहने लगी कि मैं कल सुबह आपको फोन कर दूंगी। आप उस टाइम पहुंच जाना। अगले दिन जब सुबह मुझे आशा ने फोन किया तो मैं होटल में पहुंच गया और जब मैं होटल पहुंचा तो वह लोग तैयार थे लेकिन थोडे समय बाद उसकी मां की तबीयत खराब हो गई और वह कहने लगी कि मैं आज नहीं आ पाउंगी। तुम लोग घूम आओ, मैं होटल में ही इंतजार करती हूं। अब मैं उन्हें अपने साथ घुमाने ले गया और आशा मेरे साथ आगे ही बैठी हुई थी। जब मै उन्हें घुमा रहा था तो मैं बार-बार आशा को देखे जा रहा था। मैं उसको शीशे में देखता तो उसका चेहरा मेरे सामने होता। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब वह मेरे साथ आगे बैठी हुई थी। एक बार गलती से मेरा हाथ उसके हाथों में लग गया और वह बहुत ज्यादा खुश हो गई। वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगी और मैं भी उसे देख कर मुस्कुरा रहा था। अब मुझे अंदर से ऐसा लग रहा था जैसे मुझे उसके लिए कुछ फीलिंग है। मैंने उन्हें अगले दिन भी होटल में छोड़ दिया। रात को मैंने आशा को मैसेज कर दिया। जब मैंने उसे मैसेज किया तो उसने भी मुझे मैसेज का रिप्लाई कर दिया। उस दिन मैंने रात को उससे बहुत देर तक फोन पर बात की। वह मुझसे बहुत ही अच्छे से बात कर रही थी और मैं भी उससे बहुत देर तक बात करे जा रहा था। जब मैं उससे बात करता हूं तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता था।

हम दोनों की बहुत ज्यादा फोन पर बात हो रही थी और मुझे लग रहा था कि मुझे उसे मिलना चाहिए। मैं रात को ही उसके होटल में पहुंच गया और वह अपने मम्मी-पापा से बहाना बना कर मुझसे मिलने आ गई। जब वह मुझसे मिलने आई तो हम दोनों होटल के पीछे चले गए। मैं उसे अपनी कार के अंदर ले गया और जब मैं उसे अपनी कार में ले गया तो मैं उसे किस करने लगा। वह भी मुझे किस करने लगी हम दोनों एक दूसरे को बड़े अच्छे से किस रहे थे उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था और मैं भी उसे किस कर रहा था। मुझे इतना मजा आ रहा था उसके होठों को चूमने में की मैंने उसके स्तनों को पकड़ लिया और बड़ी तेजी से दबाना शुरू कर दिया। उसने छोटी सी निक्कर और टी-शर्ट पहनी हुई थी मैंने एक ही झटके में उसे नंगा कर दिया और जब मैंने उसका बदन देखा तो मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया। मेरे शरीर की गर्मी बढने लगी थी अब मैंने उसके स्तनों को जैसे ही अपने मुंह में लिया तो वह बहुत ही खुश हो गई। उसने भी मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया और मेरे लंड को चूसने लगी। वह बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था जब वह मेरे लंड को चूस रही थी थोड़ी देर बाद मैंने उसकी योनि को चाटना शुरू किया और मै अच्छे से उसकी योनि को चाट रहा था। उससे भी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाल दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी योनि में डाला तो वह चिल्ला उठी और कहने लगी तुमने तो मेरी चूत फाड दी है। जब मैंने अपने लंड को देखा तो उसका खून टपक रहा था।

मैं उसे बड़ी तेजी से झटके दिए जा रहा था। मैं तेजी से उसे चोद रहा था मुझे बहुत ही मजा आने लगा वह मचलने लगी। उसका शरीर पूरा गर्म हो चुका था और मेरे शरीर भी गरम होने लगा था। मैंने उसे अपनी गाड़ी के बाहर घोड़ी बना दिया और उसने कार की सीटों को पकड़ा हुआ था। मैंने दरवाजा खोल रखा था मैं उसके नरम चूतडो को तेजी से झटके दिए जा रहा था। मैं इतनी तेजी से उसे चोद रहा था कि मुझे बड़ा ही आनंद आ रहा था। उसकी चूतडे पूरी लाल हो गई उसकी उत्तेजना और बढ़ने लगी। मैंने उसके चूतडो के ऊपर अपने हाथ से दो-तीन निशान भी मार दिए थे और उसके स्तनों को मैं अच्छे से दबा रहा था। वह बहुत ही ज्यादा खुश हो रही थी और अपने चूतडो को मुझसे मिलाने पर लगी हुई थी। उसकी चूतडे जब मेरे लंड से टकराती तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता। मैं अब बड़ी तेजी से उसे झटके दिए जा रहा था। मैंने इतनी तेज तेज उसे चोदता जाता कि मेरा वीर्य मेरे लंड के ऊपर तक पहुंच चुका था और जैसे ही मेरा वीर्य पतन उसकी योनि के अंदर हुआ तो मुझे बड़ा ही मजा आया।