मकान मालिक के लड़के ने लड़की को चोदा


हेल्लो मेरे चूत के प्यासे ओर बक्चोद दोस्तों कैसे हो आप सब | आशा करता हूँ की आप लोग सब ठीक होंगे | ठीक ही होगे सालो वेसे भी मूँड ऑफ में कोन सेक्सी कहानिया पढता है क्यों भाई लोगो | तो चलिए दोस्तों आप लोग थोडा मेरे बारे में जान लीजिये फिर मैं आप लोगो को अपने जीवन की सच्ची घटना बताता हूँ | दोस्तों मेरा नाम अखिल है | मैं अपनी पढाई पूरी कर चूका हूँ | और अब मैं जॉब की तलाश में हूँ | मेरे घर में मेरे मम्मी-पापा और एक छोटा भाई है | पापा मेरे फार्मर है और मम्मी एक हाउसवाइफ है | छोटा भाई मेरे से 1 साल छोटा है तथा वो अभी 12वीं में पढता है |

तो चलिए भाइयो मैं अपनी इस परिचय कहानी को ज्यादा आगे न बढ़ाते हुए सीधा आप लोगो कहानी की ओर ले चलता हूँ |

तो दोस्तों ये बात उस समय की है जब मेरा बी.कॉम का लास्ट एयर था | दोस्तों मैं अपने कॉलेज का लास्ट इयर ख़त्म होने का इन्तजार कर रहा था | क्योकि मुझे रुपयों की सक्त जरुरत पढ़ती थी और मैं घर से रूपये लेना पसंद नही करता |  मैंने 12 th की पढाई तक अपने घर वालो से रूपये लिए | और जब मैं ग्रेजुएशन में आया तब मैंने अपने घर से रूपये लेने बंद कर दिया था | जैसे तैसे करके मैं अपना खर्चा चलता था | मुझे थोड़ी प्रॉब्लम होती थी पर मेरा खर्चा चल जाता था | इसके पीछे एक रीज़न भी था मेरे दोस्तों मेरी कुछ गलत आदते गलत संघत में रहके पड़ गयी थी और मेरे घर वाले भी जन गये थे इसलिए वे मूझे कम पैसे देते थे जिनसे मेरा भला नही होता और मुझे और पैसों की जरुरत पड़ती थी | मेरी गलत आदत 12 th से स्टार्ट हुई थी | जब मैं अपनी 12 th की पढाई करता था तब मैं कॉलेज के हॉस्टल में ही रहता था | वहां मेरी ऐसे लडको से दोस्ती हो गयी जो साले एक नंबर के आइयास थे | वो रोज रात को हॉस्टल में गार्ड को थोड़े रूपये दे देते थे और उससे दारू मंगवा लेते थे | और रात भर हम लोग दारू पीते थे | जब तक मैं हॉस्टल में उन लोगो के साथ रहा तब तक मैंने भंड  दारू तरीके से दारू और आइयासी की क्योकि तब मूझे घर से मतलब भर का रुपया मिलता था | जिन्दगी पूरे मौज से कट रही तथी किसी भी चीज की दिक्कत नही होती थी | हम लोग पारी-पारी से एक दुसरे को पिलाते थे | अगर हम लोगो के पास मतलब भर के रूपये नही होते थे तो हम लोग सब मिलकर कॉन्ट्रिब्यूशन कर लेते थे और खूब हॉस्टल में दारू पीते थे | धीरे-धीरे मैंने अपने 12 th की पढाई पूरी कर ली और अब मैं अगली पढाई के लिये बी.कॉम में एडमिशन ले लिया |

मैं अपनी बी.कॉम की पढाई अपने घर से ही जाकर करता था | सब मेरे दोस्त इधर-उधर हो गये थे | सारे मजे कम हो गये थे | कुछ दिन तक तो मेरे घर वालो को मेरी आइयासियो के बारे में नही पता चला फिर धीरे-धीरे सब जान गये थे | मेरे घर वालो ने मेरी पॉकेट मनी कम कर दी जिसमे की मेरा भला नही होता था | मेरी थोड़ी आइयासियो कम हो गयी थी | धीरे-धीरे मैंने अपनी ग्रेजुएशन का 2 साल बीत गये थे अब लास्ट इयर बचा था | जब मेरा दारू पिने का मन होता था तब मैं और मेरे पड़ोस के दोस्त मिलकर रूपये मिला लेते थे और दारू लेक पी लेते थे | महीने में कहीं 1-2 बार हम लोग दारू पीते थे | इतने रूपये नही हो पाते थे की हम लोग दारू पियें | धीरे-धीरे मैंने अपनी बी.कॉम की पढाई पूरी कर ली अब मैं जॉब करना चाहता था | मैंने जॉब के लिए कई जगह अप्लाई कर दिया | एक दिन मुझे दिल्ली की किसी कंपनी से काल लेटर आया | मैंने रात को अपनी पैकिंग की और और सुबह बस पर बैठ गया | पूरा दिन और एक रात के बाद मैं दिल्ली पहुंचा आके | मेरे यहाँ से दिल्ली बहुत दूर है | जब मैं अपने घर से दिल्ली आ रहा था तब बस की सीट पर बैठा था और मेरे जस्ट सीधे हाथ पर स्लीपर कोच था उसमे 1 कपल था | जब रात के 1 बजे तो ऊन लोगो ने रोमांस करना शुरू किआ | उन्होंने स्लीपर कोच के परदे कवर कर दिए और सेक्स करना स्टार्ट कर दिया | उनके कम्पार्टमेंट  का हलका सा शीसा खुला रह गया था उसमे से लेडीज के मुह से आह आह आह आहा आहा आहा आहा आहा आहा आहा आहा आहा आहा आह आह आहा आह आहा आहा आहा आहा आहा आहा अह आह आहा आहा आहा आह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह ओह्ह ओह्ह ओह ओहोह की ससिस्कारिया आ रहा थी | कुछ लोगो की नींद उनकी सिस्कारिया सुनकर खुल गयी टी वे सब लोग मजे ले रहे थे उनकी सिस्कारियो का |

अगले दिन मैंने उस कंपनी में इंटरव्यू दिया मैंने इंटरव्यू पास कर लिया था और काल से मूझे अपनी सर्विस पर जाना था | मैंने दिल्ली में ही एक अच्छे से मकान में रूम ले लिया | सब कुछ मैंने अपनी अरेंजमेंट कर ली धीरे-धीरे मुझे 1 महिना होने को आया  था और मेरी सैलरी भी आने वाली थी | मुझे बहुत खुसी थी की चलो मेरी जॉब लग गयी है अब मुझे घर वालो से रूपये मांगने की जरुरत नही पड़ेगी और मैं अपनी जरूरतों को भी अपने रुपयों से  पूरा कर सकता हूँ | जहाँ मैंने कमरा लिया था वहां के मकान मालिक के लड़के से मेरी दोस्ती हो गयी थी | उसने 3-4 बार मुझे अपने रुपयों से दारू पिलाई थी | काफी अच्छी जान पहचान हो गयी थी उससे | जब मैंने अपनी सैलरी निकाली तब मैं बहुत खुस हुआ था | मैंने उसमे से कुछ रूपये अपने घर पहुंचा दिए थे और आधे रूपये मेरे पास थे मैं अपने कमरे पे आया | मैंने मकान मालिक के लड़के को लिया और वाइन शोप से दारू लेके आये और छत्त पर चले गये | वहां पर थोड़ी देर तक हम लोगो ने दारू पी फिर बाद मैं मकान मालिक के लड़के ने अपने किसी जान पहचान की लड़की को बुला लिया | उसने भी हम लोगो के साथ 1-2 पेग्ग पिए और बाद में मेरे दोस्त ने उसको चूमना स्टार्ट किया | मैंने थोडा लिहाज किया और वहां से खड़ा ही हो रहा था की उसने मेरा हाथ पकड़ कर वहीँ बैठाल लिया और कहा की यहाँ से कहीं नही जाना है आपको ,यहीं बैठो मैं भाई बैठ गया | थोड़ी देर के बाद कुछ ओर ही सीन होने लगा उसने उसके सारे कपडे निकाल दिए और उसके बूब्स दबाने लगा और उसकी चूत मैं उंगली डाल कर फिंगरिंग कर रहा था लड़की के मुह से आह आह आह आहा आहा उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह्ह ओह्ह्ह ओह्ह ओह्ह्ह ओह्ह की सिस्कारिया निकल रही थी | अब मेरा भी मन उसे चोदने का कर रहा था | पर वो उसका माल था मैं कुच्छ कह भी नही सकता था | मैं चुप-चाप बैठकर नज़ारे देखता हुआ दारू पी रहा था | थोड़ी देर बाद मेरे दोस्त ने अपने भी कपडे उतार दिए और अपना लंड उसके मुह में देके उसे चूसाने लगा और अपने मुह से आह आह आया आह आः आह आह्ह आह आह आहा आहा आहा आहा आहा उन्ह उन्ह उन्हुंह उन्ह ओह्ह्ह की सिस्कारियां निकाल रहा था | उसके बाद में उसने उस लड़की को वहीँ छत्त पर लिटा दिया और उसे चोदने लगा | वह नशे में इतने जोर उसकी चूत में अपना लंड डाल रहा था की लड़की के मुह से जोर-जोर से आह आह आह आहा आह आहा आहा आहा आहा आह आहा आहा उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह आह आह आह आहा अह आ हाह की सिस्कारियां निकाल रही थी | मुझे कण्ट्रोल नही हो रहा था तो मैं भी साइड में जाके अपने लंड को हिला कर अपनी गर्मी निकाल दी थी | फिर उसने उसे चोदने के बाद उसे बाहर तक चुपके से निकाल आया | और वापस आके मेरे पास बैठ गया आके | मैंने उससे मजाक में पूंछा की भाई भाभी थी क्या तो उसने मुझसे कहा की नही भाई ये तो 500 रुपयों पर आयी थी रंडी थी | मैंने उसे कहा की भाई मेरी भी लंड की गर्मी शांत करवा | अगले दिन वो मुझे जी.बी. रोड ले के गया वहां रंडियो की भरमार थी | मैंने एक मस्त सी रंडी को पसंद किया और उसे अपने दोस्त की गाडी में बैठाल लिया और शून-शान रास्ते पर ले गये | मेरे दोस्त ने गाडी रोकी और वो गाडी से निकल गया | मैंने उसे गाडी में ही चोदना चाहा | सबसे पहले तो मैंने उसके सब कपडे उतार दिए और अपने भी | मैंने उसके गुलाबी होंठो को थोड़ी देर चूमा और फिर बाद में मैंने उसकी चूत मैं अपना लंड डाल कर चोदने लगा | थोड़ी देर के बाद मैं उसकी चूत में झड गया | मैंने कपडे पहने उसको रूपये पकडा कर वहीँ छोड़ आये और देर को अपने कमरे पे लौट आये |

तो दोस्तों ये थी मेरी कहानी | आज मैं जो भी अय्याशी करता हूँ अपने रुपयों पर करता हूँ और घर वालो को भी हर महीने रूपये भेजता हूँ | आशा करता हूँ की आप सभी को पसंद आएगी |


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