मैंने अपनी दोस्त को पति से चुदवाया


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मेरा नाम ललित है और मैं फैजाबाद का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 26 वर्ष है और मैं फैजाबाद में ही छोटे-मोटे काम कर के अपना गुजारा चलाया करता हूं। मेरे पिताजी हमारे घर का खर्चा उठाते हैं और मेरी तीन बहने भी हैं लेकिन अब मुझ पर भी जिम्मेदारी आने लगी है और मुझे भी एहसास होने लगा है कि शायद मुझे भी कुछ काम करना चाहिए। क्योंकि इतने कम पैसों में तो मेरा गुजारा नहीं चलने वाला। जिस वजह से मैं कई बार अपने पिताजी से भी बात करता हूं। वह मुझे कहते हैं कि बेटा अब तुम्हें कुछ करना चाहिए। तुम भी अब बड़े हो चुके हैं और तुम्हें भी अपनी जिम्मेदारियों को समझ लेना चाहिए। अब तक मुझसे जितना हो सकता था मैंने उससे ज्यादा ही तुम लोगों को दिया है और कभी भी मैंने तुम्हे किसी चीज की कमी नहीं होने दी लेकिन अब धीरे-धीरे मेरी उम्र होती जा रही है और मुझसे अब इतना काम भी नहीं हो पाता जितना मैं पहले कर पाता था। इसलिए तुम कुछ ऐसा करो जिससे कि हमारी सारी तंगी दूर हो जाए और हम आराम से अपनी जिंदगी जी पाएं। मुझे भी अब अंदर से लगने लगा था कि मुझे कुछ अच्छा करना चाहिए। मेरे अंदर से आवाज आने लगी थी और मैंने अपना मन बना लिया था कि मैं अब दिल्ली नौकरी की तलाश में चला जाऊंगा और वहीं कुछ काम देख लूंगा। मेरे पास कुछ पैसे जमा थे।

मैं उन पैसों को लेकर दिल्ली चला गया। जब मैं दिल्ली गया तो मैंने अपने लिए वहां पर एक छोटा सा कमरा ले लिया। जिसका किराया बहुत ही कम था। पर मुझे फिलहाल काम चलाना था। वहां पर मैं किसी को जानता भी नहीं था। इस वजह से मुझे वह कमरा लेना पड़ा। अब मैं वहीं पर रहता था और अपना गुजारा चला रहा था। मैं अब नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था लेकिन मुझे कहीं पर भी कोई अच्छी नौकरी नहीं मिल पा रही थी। मैंने नौकरी की तलाश में बहुत ज्यादा धक्के खाए और अब ऐसा लगने लगा था कि शायद मैं हार ना मान जाऊ और मुझे अपने घर वापस लौटना पडे लेकिन मुझे जब अपनी बहनों का ख्याल आता और अपने पिताजी का चेहरा मुझे दिखाई देता तो मुझे ऐसा लगता कि मुझे कुछ करना ही चाहिए। क्योंकि उन लोगों को मुझसे बहुत ज्यादा उम्मीदें थी। यदि मैं घर वापिस चला गया तो उन लोगों को बहुत ही बुरा लगेगा इसलिए मैंने सोच लिया था कि मैं घर वापिस नहीं जाऊंगा और यहीं पर रह कर कुछ काम करूंगा। मैं जहां पर रहता था उसी के सामने पर एक किराने की दुकान थी। उस दुकान वाले ने मुझे कहा कि यदि तुम्हें मेरे यहां पर काम करना हो तो तुम काम कर सकते हो। मैंने सोचा फिलहाल इसके यहीं पर काम कर लेता हूं। क्योंकि जब तक मुझे कहीं अच्छी जगह नौकरी नहीं मिल जाती तब तक मेरा खर्चा ही निकल जाया करेगा। मेरे कमरे का खर्चा और खाने-पीने का  खर्चा निकल जाएगा। इसलिए मैंने वहीं दुकान पर काम कर लिया और मुझे वहां काम करते हुए काफी समय हो चुका था। अब मैं सोचने लगा कि मेरी जिंदगी में कब अच्छा होगा।

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यदि मैं दुकान में ही काम करता रहा तो ऐसा ना हो कि कहीं मैं यहीं पर काम करता रह जाऊं और मेरे आगे बढ़ने का सपना बिल्कुल अधूरा रह जाए। इसलिए मैं कुछ नया करना चाहता था। फिर मैंने वहां से काम छोड़ दिया था और मैं कुछ दिनों तक खाली ही बैठा हुआ था लेकिन मुझे चिंता हो रही थी कि मुझे आगे क्या करना चाहिए। मैं अब दोबारा से अपने लिए कहीं अच्छी जगह नौकरी ढूंढने लगा लेकिन कहीं पर भी मुझे अच्छी नौकरी नहीं मिल रही थी। जहां भी मैं जाता हूं वहां पर तनख्वाह बहुत कम होती थी और मुझे लगता था कि शायद मैं वहां पर गुजारा नहीं कर पाऊंगा। इसलिए मैंने नौकरी का विचार अपने दिमाग से छोड़ दिया था। एक

दिन मैं इंटरव्यू देकर वापस आ रहा था तो मुझे बहुत तेज भूख लग रही थी और मैंने सोचा मैं रेस्टोरेंट में बैठ कर कुछ खा लेता हूं। मैं जब वहां बैठकर खा रहा था तो मेरे पास बैठे एक व्यक्ति का बैग वहीं पर छूट गया और वह वहां से चले गए। मैंने देखा कि वह बैग मेरे सामने ही रखा हुआ है। मैं उसे अपने साथ घर ले आया। जब मैं घर लाया तो उसके अंदर बहुत सारे पैसे पड़े हुए थे। उसमें उनका कीमती सामान और उनके कुछ डॉक्यूमेंट भी थे। जिसमें उनका मोबाइल नंबर भी था। मुझे ऐसा लगा कि वह पैसे अपने पास ही रख लूं लेकिन फिर मैंने सोचा कि मुझे उनका बैग लौटा देना चाहिए और मैंने उनको वह बैग लौटा दिया। जब मैं उनके पास वह बैग लेकर गया तो वह बहुत ही खुश हो गए और कहने लगे कि आजकल ईमानदारी का बिल्कुल भी जमाना नहीं है। तुमने ईमानदारी दिखाई। अब वह व्यक्ति मुझसे बहुत खुश हो गए। उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम क्या करते हो। मैंने उन्हें बताया कि मैं अभी कुछ भी नहीं कर रहा हूं। उन्होंने मुझे कहा कि तुम मेरे साथ ही काम कर लो। अब मैं उनके साथ ही काम पर लग गया। उनका नाम रमेश था और वो बहुत ही अच्छे इंसान है। मैं उनके साथ उनके घर का भी काम कर लिया करता और उनकी पत्नी मुझसे बहुत खुश थी। मैं उनके साथ उनके ऑफिस का भी काम करता था और अब मैं उनके साथ काम सीखने लगा।  अब मैं काफी काम सीख चुका था। इस वजह से वह मुझ पर बहुत ही भरोसा किया करते थे।

एक दिन मैं ऑफिस में ही था उस दिन रमेश आए और कहने लगे तुम क्या कर रहे हो। मैंने उन्हें कहा कि सर मैं थोड़ा काम कर रहा हूं। वह कहने लगी कि तुम काम बाद में करना तुम जल्दी से मेरे ऑफिस में आओ। मैं जब उनके ऑफिस में गया तो वह बहुत तेज तेज हांफ रहे थे। मैंने उन्हें कहा कि आप को क्या हो गया है वह कहने लगे मेरी गांड में खुजली हो रही है तुम्हें उसे मिटाना है। उन्होंने मेरे सामने अपनी गांड को कर दिया। मैंने जब उनकी गांड को देखा तो मेरा दिमाग खराब हो गया। मुझे ऐसा लगा कि उनकी गांड कितनी मुलायम है। उन्होंने मेरे लंड को हिलाते हुए अपने मुंह के अंदर ले लिया और वह बड़ी तेजी से मेरे लंड को हिलाए जा रहे थे कि मुझे बहुत मजा आ रहा था। उन्होंने मेरे लंड को मुंह के अंदर समा लिया और उसे चूसने लगे। वह मेरे लंड को इतनी तेजी से चूस रहे थे कि मेरा पानी निकलने वाला था। उन्होंने अपने मुंह से मेरे लंड को निकालते हुए अपनी गांड को मेरी तरफ कर दिया। कुछ देर तक मैने उनकी गांड को चाटा और अब मैंने जैसे ही उनकी गांड के अंदर अपने लंड को डाला तो उन्हें जैसे शांति मिल गई हो। वह बहुत ही आराम से मेरे आगे खड़े थे और मैं उन्हें बड़ी तेज तेज धक्के मार रहा था। मै उनकी गांड मार रहा था तो वह कहने लगे कि तुम बहुत ही अच्छे से मेरी गांड मार रहे हो मुझे बहुत ही मजा आ रहा है। वह मझसे अपनी गांड को टकराने लगे। मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था और उनकी गांड से खून निकल रहा था। उन्हें बड़ा ही मजा आ रहा था और वह भी मुझे पीछे की तरफ धक्का देते तो मैं उन्हें आगे की तरफ बड़ी तेज झटका मार देता। जिससे कि उनका पूरा शरीर हिलता मैंने उनकी गांड को कसकर पकड़ लिया और बड़ी तेज तेज उनकी गांड मारी। उन्हें बहुत मजा आ रहा था कुछ देर बाद उनकी गांड से कुछ ज्यादा ही गर्मी निकलने लगी मुझसे भी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था और मेरा वीर्य उनकी गांड के अंदर ही गिर गया। वह बहुत ज्यादा खुश हुए और वह कहने लगे कि तुमने आज मेरी खुजली को मिटा दिया है मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। उसके बाद उन्होंने मुझे बहुत सारे पैसे देने शुरू कर दिए और मैं जब उनकी गांड मारता तो वह हमेशा ही मुझे पैसे दिया करते थे। वह मुझ पर बहुत ही ज्यादा मेहरबान रहते थे जिसकी वजह से  उन्होंने मुझे एक घर भी दे दिया था। मैं उन्हें उसके बदले खुश कर दिया करता था। वह मुझसे बहुत ही ज्यादा खुश रहते थे जब मैं उनकी गांड मरा करता था। वह मुझे कहते जब भी तुम मेरी गांड में अपने लंड को डालते हो तो मुझे बड़ा ही मजा आता है और मेरी सारी खुजली को तुम एक ही झटके में मिटा देते हो। मैं बहुत खुश था क्योंकि अब मेरे पास बहुत पैसे हो चुके थे।