ले ले आजा चूत ले ले


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मेरा नाम आशीष है। मैं कॉलेज में फर्स्ट ईयर में पढ़ता हूं। मेरे पिताजी एक बिजनेसमैन है और वह काफी अच्छे बिजनेसमैन हैं। वह यह चाहते हैं कि मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका बिजनेस संभाल लूं लेकिन वह मुझे इस लायक समझते नहीं है। हमेशा ही मुझे ताने देते रहते हैं कि तू जिंदगी में कुछ कर नहीं पाएगा। मेरे दोस्त लोग मुझे काफी ताने देते हैं। वह भी यही कहते रहते हैं कि तू किसी भी चीज़ में अच्छा नहीं है। मैं ताने से काफी परेशान हो चुका था। सब लोग मुझे बहुत ही निकम्मा समझते हैं। लेकिन मैं इस तरीके का नहीं हूं मैं अपने जीवन में कुछ करना चाहता हूं लेकिन जब भी मैं कुछ करना चाहता हूं तो वह उल्टा हो जाता है। उसे कोई भी समझता नहीं है और ना ही मेरा कोई अच्छा दोस्त है। जिसकी वजह से मैं अपनी बातों को शेयर भी नहीं कर सकता हूं और मुझे कोई समझ पाए जिस से में अपने दिल की बात बताऊं।  मैं अपनी जगह पर सही हूं लेकिन वह सब उल्टा हो जाता है जो भी मैं सही करना चाहता हूं।

कॉलेज में भी सारे दोस्त मेरी इंसल्ट करते रहते हैं। मुझे नीचा दिखाने की कोशिश करते रहते हैं। वह अपनी गर्लफ्रेंड से मुझे मिलाते हैं तो वहां पर भी मेरी बेइज्जती करवा देते हैं। इस वजह से कॉलेज में भी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं बन पाई है। मैं सिर्फ  मुट्ठ मार काम चला रहा हूं। लेकिन मैं भी चाहता हूं कि मैं भी किसी को चोदूं लेकिन ऐसा हो ही नहीं पा रहा है। क्योंकि ना तो मेरा कोई अच्छा दोस्त है जो मुझे समझ पाता है।

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एक बार मेरी बुआ की लड़की अपने कुछ काम के सिलसिले में हमारे घर आई मैं उसे पहचानता नहीं था क्योंकि वह मुझे काफी वर्षों पहले मिली थी। वह एक अच्छी नौकरी करती थी लेकिन उसने मुझे पहचान लिया। मुझे पूछने लगी तुम क्या करते हो। मैंने उसे बताया कि मैं कॉलेज में हूं और फर्स्ट ईयर में हूं। वह कहने लगी पढ़ाई कैसी चल रही है तुम्हारी मैंने कहा कि ठीक चल रही है।

शाम को मेरे पिताजी घर आ गए थे और मेरी बुआ की लड़कियों से मिली जिसका नाम अंजलि था। अंजलि मुझसे 8 साल बड़ी थी और उसकी शादी भी हो चुकी थी। उसका पति कहीं विदेश में नौकरी करता है। वहां पर वह इंजीनियर है बहुत अच्छी पोस्ट में है। मेरे पिताजी मुझे कहने लगे अंजलि को देख कितना अच्छा काम कर रही है। और एक तू है कुछ भी नहीं करता है हमेशा ही निकम्मा बना रहेगा अपने जीवन में कुछ भी नहीं करने वाला है। अंजलि ने मेरी साइड लेते हुए कहा अरे ऐसा मत बोलो वह कर लेगा कुछ ना कुछ और आप टेंशन ना लें आप फालतू में ही टेंशन ले रहे हैं। पहले मैं भी पढ़ने में अच्छी नहीं थी लेकिन अब देखो मैंने भी अपने आप को सेट किया है। उसकी बात सुनकर वह मुझे अच्छी लगने लगी। मुझे ऐसा लगा जैसे कोई तो है जो मुझे समझने लगा है। वह अपने प्रोजेक्ट से 6 महीने के लिए हमारे घर पर आई हुई थी। मुझे तो जैसा आदत हो चुकी थी ताने सुनने की तो मैं छत पर टहल रहा था। छत पर टहलते टहलते हुए वह मेरे पास आई और कहने लगी  तुम्हें क्या टेंशन है। मैंने उसे अपनी सारी बात बताई और कहने लगा मुझे कोई कुछ समझता ही नहीं है। कॉलेज में कुछ लोग मेरी बेइज्जती करते रहते हैं और घर में तो आप देख ही रहे हैं। मेरे पिताजी मुझे जिस तरीके का समझते हैं। मैं इस तरीके का नहीं हूं जिस तरीके से वह समझते हैं। मैं भी अपने जीवन में कुछ करना चाहता हूं लेकिन ना चाहते हुए भी वह उल्टा हो जाता है। इसी वजह से यह सब मुझे नफरत करते हैं।

अंजलि भी मेरे पास में बैठ गई और मुझे समझाने लगी। आशीष ऐसा कुछ नहीं है पहले मैं भी पढ़ने में अच्छी नहीं थी लेकिन बाद में मैंने अपने आप को सुधारा हर एक फील्ड में और मैं एक अच्छी नौकरी कर रही हूं। मैं खुश हूं अपने काम से क्योंकि जो मैं चाहती थी मैं वही कर रही हूं। मैंने अंजली से पूछा क्या आप मेरी हेल्प करेंगे मैं आगे क्या करूं। मुझे कहने लगी क्यों नहीं जैसे ही मुझे टाइम मिल जाया करेगा। मैं तुम्हारी हेल्प कर दिया करूंगी। जब भी वह शाम को आती तो वह मुझे पढ़ाने लग जाती है। मुझे उसका पढाया हुआ वह भी काफी समझ आने लगा था। वह मुझे अच्छी लगने लगी थी क्योंकि वह मुझे बहुत अच्छे से पढ़ाती थी। ऐसा मुझे आज तक किसी ने नहीं पढ़ाया था। वह मुझे कहने लगी कि तुम पढ़ने में तो अच्छे हो लेकिन तुम्हें याद नहीं रहता मैंने उससे कहा हां यही समस्या मेरे साथ है लेकिन मैं कोशिश करूंगा। मैं अब पढ़ने लगा अच्छे से एक दिन मेरे पिताजी मेरी माता जी को अपने साथ किसी काम से ले गए और अंजलि और मैं घर पर अकेले थे। अंजली बाथरूम में नहा रही थी। तो मैं उससे चुपके से देखने लगा। जैसे ही उसने अपने कपड़े खोले उसका बदन देखकर मैं पागल हो गया। मेरा लंड खड़ा हो गया मैं काफी देर से उसे देख रहा था और शायद उसने भी मुझे अंदर से देख लिया था। उसकी पिंक चूत मेरे तो होश ही उड़ गए थे उसे देखकर बहुत ही मुलायम और चिकनी थी। उसके बूब्स भी बहुत बड़े-बड़े थे। जिन्हें देखकर मुझे बहुत अच्छा लगने लगा और उसकी गांड बहुत बड़ी थी। अब वह बाहर आई वह समझ चुकी थी। मेरे मन में क्या चल रहा है। मुझे पढ़ाने लगी पढ़ाते पढ़ाते उसने मुझसे पूछा, तुम बाथरुम से झांक रहे थे ना मैंने पहले उसे मना किया लेकिन बाद में उसे हां कह दिया। मैंने उसे कहा आपका फिगर तो बड़ा ही अच्छा है। और आपका जिस्म तो एक नंबर का है। उसने मुझसे पूछा क्या तुम्हें दोबारा देखना है। मैंने कहा हां क्यों नहीं अब वह मेरे सामने अपने पूरे कपड़े उतारने लगी और एकदम नंगी हो गई। जैसी ही वह नंगी हुई मैंने भी अपना लंड अपनी जींस से बाहर निकला। वह मेरे लंड को देख कर बोलने लगी तुम्हारा तो बहुत ही मोटा और लंबा भी है। मैंने अपने पूरे कपड़े उतार दिया और उसे पकड़ लिया। मैं उसकी बड़ी बड़ी गांड पर अपना लंड रगड़ने लगा जैसे ही मैं करता वह भी अपनी बडी गांड को सटा लेती अब मैं लेटा कर उसकी योनि पर अपना लंड लगने लगा। जैसे ही रगडता जाता उसका पानी निकलता जाता। अब मैंने उसके स्तनों पर भी अपना लंड रगड़ना शुरू कर दिया। उसने अपने हाथ से पकड़ते हुए मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया। मेरे अंडकोष उसके स्तन पर टकरा रहे थे। वह अपने मुंह मे ले रही थी। मैं उसके स्तनों के ऊपर बैठा हुआ था। जैसे ही वह अपने मुंह में लेती तो मेरा और सख्त हो जाता। थोड़ी देर बाद मेरा गिरने वाला था। तो मैंने अंजलि के बड़े बूब्स पर अपना वीर्य गिरा दिया। जिससे उसने अपने हाथों से पूरे स्तनों पर फैला लिया। उसे काफी अच्छा लगा यह सब मैंने किया। मै उसकी योनि में अपने लंड को डालना शुरू किया जैसे ही मेरा टोपा अंदर गया। वह चिल्लाने लगी और मुझे भी अच्छा महसूस होने लगा कि मेरा अंदर जा रहा है। धीरे-धीरे मैंने उसकी योनि की दीवार तक अपने लंड को अंदर तक डाल दिया। अब मेरा पूरा अंदर जा चुका था और उसके मुंह से आवाज निकल रही थी। मैंने इतनी तेजी से किया उसकी आवाज निकलती और चुप हो जाती वह मुझे कहती तुम तो बड़े अच्छे से करते हो। तुम्हें कौन कहता है तुमने कमी है। तुम्हारे अंदर भी एक टैलेंट है जो इतने दिनों से छुपा हुआ था। मैंने इसको अच्छा से पहचान लिया है। यह सुनकर मैंने उसको इतनी जोर जोर से झटके मारने लगा कि उसके पेट तक मेरा लंड जाता और मैं उसे बाहर निकाल कर उसकी चूत के अंदर कर देता। ऐसा करते-करते मैंने उसे बहुत ही गंदी तरीके से चोदा। वो कहने लगी तुम तो बहुत अच्छे से कर रहे हो।  उसकी योनि से भी गर्मी निकलने लगी थी। मेरा उस गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और मेरा वीर्य पतन हो गया। मैंने अपना वीर्य उसके योनि में डाल दिया।

जिससे वह काफी खुश हुई और मुझे कहने लगी। आज तुमने अपना हंड्रेड परसेंट दिया है तुम्हारे अंदर एक बहुत ही अच्छा आशिक है। इस तरीके से मैंने अपने टैलेंट को समझा और अपनी ही बहन को बहुत अच्छे से चोदा जिससे उसकी इच्छा भी पूरी हो गई क्योंकि उसका पति भी बाहर ही था। वह भी उसे खुश नहीं कर पा रहा था। वह 6 महीने तक हमारे घर पर रही और 6 महीने तक मैंने उससे 1 दिन भी नहीं छोड़ा।