लगवालो चूत पर पहरे पर हम भी बड़े लंड वाले ठहरे


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दोस्तों मैं दिल्ली में रहने वाला एक ट्यूशन टीचर हूं। मेरी उम्र 50 वर्ष है। मेरी शादी को 20 वर्ष हो चुके हैं। मेरे दो बच्चे हैं  एक लड़का जो कि 19 वर्ष का है और मेरी लड़की 17 वर्ष की है। लड़का तो मेरा कॉलेज में पढ़ता है लड़की अभी कक्षा 12वीं में है। मुझे ट्यूशन पढ़ाते हुए काफी समय हो चुका है। पहले मैं एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता था। मैंने वहां से नौकरी छोड़ने के बाद अपना खुद का ट्यूशन सेंटर खोल लिया है। यहां पर काफी बच्चे आते हैं ट्यूशन पढ़ने के लिए कम से कम 100 बच्चों का बैच तो होता ही है। मेरे ट्यूशन सेंटर अच्छा चल रहा है। मेरे ट्यूशन सेंटर में मैंने दो टीचर रखे हुए हैं। जो मेरे साथ पढ़ाते हैं। मेरी लाइफ बहुत ही व्यस्त रहती है। मेरे पास एक भी दिन समय नहीं रहता है। सिर्फ रविवार को ही मैं फ्री हो पाता हूं। इसलिए हम लोग कभी-कभी रविवार को छुट्टी मनाने चले जाते हैं। इस वजह से मेरी सेक्स लाइफ की अच्छी नहीं है।

मैं एक-दो हफ्ते में अपनी बीवी को चोदा करता हूं। अब कर भी क्या सकता हूं इतना व्यस्त रहता हूं तो समय निकालना मुश्किल हो ही जाता है। मेरे ट्यूशन सेंटर में एक से एक नई चूत आती है। मैं उन सबको अच्छे से देखता रहता हूं और पढ़ता रहता हूं। यह भी अनुमान लगाता हूं कि किसके स्तन किस से बड़े हैं और किसके छोटे हैं। और सब की गांड का साइज़ भी देखता हूं कुछ तो मोटी होती हैं और कुछ पतली और कुछ कहो जवाब ही नहीं एकदम मस्त मस्त वाली कसम से देख कर जवानी याद आ जाती है। जब मैं स्कूल में अपने साथ वाली लड़कियों को चोदा करता था। लेकिन मैं अपनी मर्यादाओं को नहीं पार कर सकता हूं। अब सिर्फ पढ़ाने पर ही ध्यान रहता है। मेरी लड़की इस साल 12वीं में है तो वह भी हमारे ट्यूशन सेंटर आती है और वहीं पर पढ़ती है।

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यह इस वर्ष का नया बैच था इसमें नई नई चूत और गांड आई थी।इस वर्ष एक से बढ़कर एक  माल  आई थी। करीबन 90 95 बच्चे इस वर्ष भी हो चुके थे। अब हमारी क्लास का पहला दिन था और मैं सब को पढ़ाने गया। सबसे मैंने कुछ सवाल जवाब किए फोन से पूछा कि पिछले साल कितने नंबर थे तुम्हारे यह सब पूछते पूछते अपनी सीट पर इधर-उधर कर रहा था। तभी एक लड़की आई उसने उसे अंदर आने की परमिशन ली मैंने उसको अंदर आने के लिए कहा आप अंदर आ जाइए फिर वहां मेरी लड़की की बगल में बैठ गई। और दोनों ने एक दूसरे को मुस्कुराकर हेलो हाय कहा अब क्लास खत्म होने वाली थी। तो मैं जाते-जाते सबसे पुछने लगा। कैसा रहा तुम्हारा कक्षा का पहला दिन सबने बोला सर आप बहुत अच्छा पढ़ाते हैं। और उसके बाद कुछ हंसी मजाक भी हुआ यह देख कर अच्छा लग रहा था मुझसे बच्चे खुश हैं। अब जब बच्चे अपनी सारी क्लास पूरी कर कर घर जाने लगे थे। तो मेरी लड़की उस लड़की को अपने साथ मेरे ऑफिस पर ले आई।

कहने लगी क्या मैं अंदर आ सकती हूं मैंने कहा आओ अंदर आओ क्या काम है बोलो वह बोलने लगी पापा मैं आपको अपनी सबसे अच्छी दोस्त महक से मिलाती हूं। मुझे उसको देख कर अच्छा लगने लगा। उसने टी-शर्ट और जींस पहना हुआ था जिसमें साफ-साफ उसके बूब्स के उभार दिखाई पड़ रहे थे। मैं उन दोनों से बात भी कर रहा था। उसके स्तनों को निहार भी रहा था। मेरे अंदर का शैतान अभी भी जिंदा है। उसके बूब्स 32 के और गांड 34 की होगी। देखकर मजा आ रहा था उसको उसके बाद वह चले गए मैंने कहा ठीक है तुम लोग जाओ मैं कुछ काम करके घर आता हूं।

उसके बाद मैं बाथरुम में गया और वहां पर मुठ मारी महक की नाम की मुझे बहुत टाइम बाद किसी को देख कर अच्छा महसूस हो रहा था। मेरे अंदर का पुराना इंसान जाग गया था। अब मैं जब शाम को घर गया तो मेरी बेटी मुझसे बोलने लगी पापा आपसे कुछ बात करनी है। मैंने कहा हां बोलो क्या बोलना है। अब वह बोलने लगी महक के माता-पिता चाहते हैं। आप उसे घर पर ही ट्यूशन दें क्योंकि वह दोनों जॉब पर जाते हैं। तो इस कारण उसको छोड़ने में उन्हें परेशानी होती है। मैं क्या चाहता था जैसे मानो मेरी मुराद पूरी हो गई हो गई हो। सही में यार ऐसा बहुत कम होता है जब मेरे दिल की बात पूरी हो जाए। मेरी बेटी बोली कल उसके माता-पिता आपसे मिलने आपके ऑफिस में आएंगे मैंने कहा ठीक है। उन्हें बोल देना आने को फिर मैंने हाथ मत हो या और खाना खा कर आराम करने लगा। इस बात से मैं इतना खुश था। कि आज मैंने बहुत समय बाद अपनी पत्नी को चोदा था। क्योंकि मेरे अंदर का वीर्य को बाहर निकालना आवश्यक था नहीं तो वह अपने आप ही बाहर निकल जाता।

अब अगले दिन हमेशा की तरह में तैयार होकर अपने ट्यूशन सेंटर के लिए निकल पड़ा ।कुछ समय बाद जब मैं अपने केबिन में बैठा हुआ था। तो एक महिला और पुरुष मेरे ऑफिस में आए और पूछने लगे क्या हम अंदर आ सकते हैं। आप ही का नाम शर्मा जी है। मैंने कहा हां जी मैं ही हूं आइए आप बैठिए। उन्होंने अपना परिचय दिया और कहा हम महक के माता-पिता हैं। मैंने बोला हां हां बोलिए बोलिए जी उन्होंने मुझसे अपनी समस्या बताई और बोलने लगे हमारा घर थोड़ा दूर है। उसको लाने ले जाने में परेशानी होती है। इस कारण आप यदि हमारे घर पर ही उसे पढ़ाऐ तो अच्छा रहेगा मैंने कहा ठीक है मैं महक को घर पर ही पढ़ा दूंगा। यह देख कर बहुत खुश हो गए और मेरी तारीफ करने लगे कहने लगे आप बड़े ही सज्जन व्यक्ति हैं। आप पर हमें पूर्ण रुप से भरोसा है। लेकिन उन्हें क्या पता था मेरे अंदर क्या चल रहा है।

आज में महक के घर पहले दिन गया था।तो उसके माता-पिता घर पर ही थे। उन्होंने मुझे सबकुछ समझा दिया था। कुछ भी परेशानी हो तो यहां पर यह सामान रखा हुआ है। उन्होंने मुझे सब कुछ दिखा दिया था अब मैंने महक को पढ़ाना शुरू किया आज पहला दिन था। तो इसलिए मैंने कुछ नहीं किया क्योंकि उसके माता पिता भी घर पर ही थे। परंतु मैंने उसके बूब्स पर हल्का सा एक हाथ रख ही दिया था। जाते वक्त मैं उनसे मिला और वह बोलने लगे शर्मा जी हमें आप पर पूरा भरोसा है। कल से आप इसे देख लेना यह कहते हुए मैं वहां से चला गया।

जिस तरह से महक के माता-पिता को पूरा भरोसा हो गया था। उसी प्रकार महक भी मुझ पर भरोसा करती थी। मैंने महक को पढ़ाते पढ़ाते अचानक से उसकी जांघों पर अपने हाथों से उसको सहलाने लगा। मैंने जैसे ही यह किया उसने मेरे हाथों को हटा दिया। क्योंकि वह नई-नई चूत थी। इस वजह से को थोड़ा घबराहट हो रही थी। धीरे-धीरे मैंने उस को अपने काबू में कर ही लिया और हल्के से उसकी जींस का बटन खोल कर उसकी जींस को उतार दिया। उसकी जांघ बहुत मुलायम जी क्योंकि उसकी उम्र महज 17 वर्ष थी। इस उम्र में सेक्स कुछ ज्यादा ही तीव्र गति से होता है। अब महक की चूत से भी महक आने लगी थी। उसकी चूत पूर्ण रुप से गीली हो चुकी थी। फिर मैंने धीरे-धीरे उसकी चड्डी के अंदर से अपनी उंगलियों को उसकी चूत पर लगाने लगा। आप हो पूरे सवाब में आ चुकी थी।

उसने मेरी बड़ी तेजी से अपने हाथ को मेरे लंड पर रख दिया और बहुत तेज दबाने लगी। जिससे मुझे अपने पुराने दिन याद आ गए। कसम से क्या देखते हो मुझे शीला परमिला आशा सब याद आने लगी। अब मैंने ज्यादा देर ना करते हुए उसकी नरम चूत पर अपना लंड सटा दिया। और धीरे-धीरे धक्का मारना शुरू किया लेकिन मेरा लंड अंदर ही नहीं गया। क्योंकि बहुत सील पैक थी। मैंने दो तीन प्रयास किए लेकिन उसको दर्द होता था तो वह हो झटपटा कर हट जाती थी।

फिर तीसरे प्रयास के बाद मैंने अपने लोड़े का टोपा उसकी योनि में प्रवेश करवा ही दिया जैसे जैसे वह धीरे-धीरे अंदर जा रहा था वहां से खून निकलने लगा था। महक बहुत तेज चिल्लाने लगी थी मुझे लगा कहीं बेहोश ना हो जाए किंतु मैंने उसे दबोच कर रखा। इस प्रयास में मैंने अपना लंड उसकी योनि में पूरा सटा दिया था। आप बहुत थोड़ा चूक हुई लेकिन जैसे-जैसे मैंने अंदर बाहर करना शुरू किया तो खून के छींटे पूरे लंड पर लग चुके थे। उसकी योनि बहुत ज्यादा ही टाइट थी तो ज्यादा देर तक मैं कर ना सका और मेरा भी झड़ गया। मैंने उसकी जीवनी में ही अपने वीर्य को गिरा दिया। अब हमने पूरे खून को साफ किया। मुझे महक बोलने लगी कुछ होगा तो नहीं मैंने कहा कुछ नहीं होगा। डरने की कोई बात नहीं है इस प्रकार से मैंने एक और सील अपने जीवन में तोड़ी।