कमसिन चूत का मजा


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मेरा नाम अमित है और बनारस में रहता हूँ | बात तब की हैं जब मैं ग्रेज्युएशन के लास्ट इयर में था | अच्छे दिन थे जब 5 रूपये पॉकेट मनी मिलती थी जिसमे से भी 1 रुपया बच जाता था| चाचा जी बगल वाले घर में ही रहते थे, और उनकी बेटी रुचिका भी | रुचिता के बारे में बस इतना कहूँगा की उसकी फिगर कटरीना से कम नहीं थी यदि ज्यादा नहीं तो | और मैं एक अरसे से उसके बूब्स का दीवाना था |

एग्जाम नजदीक थी इसलिए मैं कोलेज नहीं जाता था और घर पे ही पढता था | मेरे माँ-बाप उस दिन किसी काम से मौसी के गाँव गए थे | मुझे बाद में पता चला की वो मेरे रिश्ते की बात करने के लिए गए थे | रुचिता से मेरी अच्छी बनती थी, वो मुझ से कुछ 4 महीने बड़ी हैं |

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उस दिन मेरा ध्यान पढाई में बिलकुल भी नहीं लग रहा था | मैं मुठ मारना चाहता था क्यूंकि घर में कोई नही था मेरे बगेर | मैंने मोबाइल में एक बड़े बूब्स वाली लड़की की क्लिप निकाली और लंड सहलाने लगा | बाहर देखा तो रुचिता बाथरूम से नहाकर निकली थी | उसने छाती तक रुमाल लपेटा था और उसके बूब्स मादक आकार बना रहे थे | मैं वही खिड़की में खड़े खड़े लंड को शांत किया और वीर्य को कोपी के एक पेज में भर के उसे बाहर फेंक दिया |

मेरी इच्छा अब रुचिता से सेक्स करने को हो रही थी | मैंने थोड़ी देर पहले ही चाची को बाहर जाते देखा था, और चाची तो सुबह ही दुकान पर निकल जाते है | वो भी घर पर अकेली ही ! मैं उठा और उसके घर में चला गया | डोर खुला ही था, मैं सीधा उसके बेडरूम की और गया | रुचिता शायद कहीं बाहर जा रही थी क्यूंकि उसने बेड के ऊपर जींस और पेंट रखा हुआ था | मैं फट से अंदर घुस गया | रुचिता शीशे के सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में खड़ी थी |  उसने मुझे देखा और उसके होश उड़ गए, उसने कहा क्या कर रहे हो ? तुम अंदर क्यूँ आये ?

मैंने कहा, रुचिता मुझे कुछ काम था इसलिए आ गया | मुझे नहीं पता था की तुम ऐसे खड़ी हो | यह सुन के वो कुछ नहीं बोली, मैं उसे देख रहा था | सफ़ेद ब्रा में उसके सफ़ेद बूब्स सेक्सी लग रहे थे | क्या देख रहे हो? तुम मस्त दिखती हो | अच्छा बाहर जाओ अब कोई आ जायेंगा तो दिक्कत होगी |

मुझे पता हैं अभी तुम खिड़की के पास खड़े क्या कर रहे थे, पर्दा हवा से उठा था 2 सेकंड के लिए और मैं यह भी जानती हूँ की तुम यहाँ क्यूँ आये हो ?

मैंने कहा, फिर कुछ मजे करा दो ना रुचिता  बहुत अरसे से तमन्ना थी तुम्हारे साथ की |

चुप कर, ऐसे नहीं होता हैं | हम भाई बहन हैं | वो टी-शर्ट उठा के बोली |

मुझे लगा की अभी नहीं तो कभी नहीं | मैं फट से उसके नजदीक गया और बोला, कजिन हैं इसलिए ही एक दुसरे को हेल्प करेंगे ना | और इतना कह के मैंने उसके बूब्स पर हाथ रख दिया | रुचिता ने कहा, कोई आ जाएगा यार |

अरे कोई नहीं आएगा सभी लोग बाहर हैं मैं उसके बूब्स को दबाने लगा | फिर एक पल की भी देर किये बिना मैंने पीछे हाथ कर के उसकी ब्रा की हुक को खोल दी | रुचिता को शर्म आ गई और उसने अपना हाथ छाती के ऊपर रख दिया | लेकिन मैंने उसके हाथ को हटा दिया और उसके बूब्स मसलने लगा | उसके निपल्स अकड चुकी थी और वो आह आह करने लगी थी | मैंने उसे मसलते हुए ही अपनी पेंट खोल के लंड बाहर निकाल लिया | रुचिता का हाथ पकड के मैंने अपने लंड पर रख दिया | वो उसे मसलने लगी | मेरा लंड काफी गर्म हो चूका था | रुचिता ने अब मेरे लंड को मुठ्ठी में बंध किया और वो उसे ऐसे हिलाने लगी जैसे की मुठ मार रही हो | मैने कहा, इसे अपने मुहं का मजा भी दे दो रुचिता | नहीं मैं मुहं में और पीछे नहीं लुंगी, यह सब गंदी चीजें हैं और मुझे नहीं पसंद |

मैंने मन ही मन सोचा की कोई नहीं फिर चूत ही अच्छी तरह दे देना साली रंडी | रुचिता की चूत के ऊपर हाथ रखने के लिए मैंने पेंटी को खिसकाया और मैंने महसूस किया की उसकी चूत बहुत ही गर्म हो गई थी | उसने शायद आजकल में ही चूत के बाल निकाले थे क्यूंकि चूत के ऊपर सब सफाई की हुई लगती थी | मैंने हलके से ऊँगली को चूत के दाने पर रख दिया और उसे मसलने लगा | रुचिता के मुहं से आह आह की आवाज निकलने लगी | मैंने उसके बूब्स मसलते हुए ऊँगली को चूत के छेद में डाल दी | इस से तो रुचिता जैसे उछल पड़ी | उसने लंड छोड़ दिया और मेरे कंधे को पकड के दबाने लगी | मैंने उसे कहा की चलो बेड में लेट जाओ |

वो बेड के ऊपर की जींस और पेंट को साइड में कर के लेट गई | मैंने सरकाई हुई पेंटी को निकाल फेंका और उसकी टाँगे फैला दी | रुचिता की चूत मस्त गुलाबी थी जिसे देख के मेरा लंड मानो उसे सलामी दे रहा था | मैंने अपनी ऊँगली को उसकी चूत में डाला और उसे अंदर बाहर करने लगा | रुचिता की आँखे बंध हो गई और उसके मुहं से वही आहा आह निकलने लगा | वो बड़ी गर्म हो चुकी थी और चुदने के लिए भी बेताब लग रही थी | मैंने उसकी चूत की साइज़ चेक करने के लिए दूसरी ऊँगली भी डाला |

उफफ्फ्फ्फ़ अरे क्या पागल हो, अंदर बैठोगे क्या ? कितना दर्द हुआ मुझे रुचिता दूसरी ऊँगली नहीं ले पाई उसका मतलबी था की उसकी चूत ढीली नहीं बल्कि टाईट ही थी | मैंने अब चूत से अपनी ऊँगली निकाली और उसे सूंघा | चूत की खुशबू पूरी ऊँगली से आ रही थी,  मैं समझ गया की रुचिता ने चूत के ऊपर वीट लगाया था | अब मैंने ऊँगली चाटा और रुचिता ने टाँगे और खोली | मैंने अब लंड को चूत के छेद पर सेट किया | रुचिता ने हाथ बढ़ा के लंड की बागडोर अपने हाथ में ले ली और उसे चूत प् रगड़ने लगी |

एकदम से मत घुसेड देना, जब मैं कहूँ तब झटका देना धीरे से | उसने चूत पर लंड रगड़ते हुए कहा | मुझे उसकी चूत की गर्मी लंड पर मिलते ही बड़ा मजा आ रहा था | वो करीब पुरे दो मिनिट चूत के ऊपर मेरा लंड घिसती रही | और उसकी चूत से बहुत सी चिकनाहट निकल के पूरा गिला कर चुकी थी | मैं समझ गया की वो चूत में घर्षण नहीं चाहती थी इसलिए उसे चिकनी बना रही थी | रुचिता ने अब आँखों से इशारा किया और मैंने हलके से पेला | मेरा लंड उसकी चूत में जाते ही उसकी आह निकली लेकिन उसमे सुख के भाव भी थे | मैंने लंड को थोडा और अंदर किया और मेरे गोटे उसकी चूत के होंठो को छूने लगे | मेरा लंड पूरा अंदर घुस गया था और रुचिता आह आह कर रही थी | रुचिता की चूत में मेरा लंड अब गोते लगा के गिला हो रहा था |

2 मिनिट तक आह आह करने के बाद अब रुचिता भी मचलने लगी | उसकी कमर और गांड हिलने लगे और उसकी वजह से उसके बूब्स भी हवा में उड़ रहे थे | मैंने निचे झुक के बूब्स को मुहं में भर लिया और जोर जोर से झटके देने लगा | मजा आ रहा हैं, और जोर से करो, आह आह आह रुचिता ने अब चुदने का मजा लूटना चालू कर दिया था | मैं भी उसके बूब्स चूस के उसे जोर जोर से ठोकने लगा| मेरा लंड उसकी चूत में पूरा जाकर बाहर आता था और जब वो चूत को दबाती थी तब तो मेरी जान ही निकल जाती थी | रुचिता की सिस्कैर्याँ बढ़ने लगी और उसके साथ ही मैं और भी जोर से उसे चोदने लगा | 10 मिनिट की धमाकेदार चुदाई के बाद मैं अपना माल उसकी चूत में ही छोड़ दिया | रुचिता ने चूत को दबा के सब अंदर ले लिया | मैंने लंड चूत से निकाला और उसे हिलाकर बची कुची बुँदे भी उसके शरीर पर ही निकाल दी | रुचिता ने उठ के अपने बदन को मेले कपडे से साफ़ किया | वही कपडे से मैंने अपना लंड भी पोंछ लिया | रुचिता खुश थी मेरी चुदाई से|

क्यूँ मजा आया के नहीं ?

मजा तो बहुत आया, लेकिन अब तुम भागो कोई आ गया तो पंगे होंगे |

मैंने कपडे पहले और रुचिता के बूब्स दबा के घर से निकल गया | उस दिन से चालु हुई हमारी चुदाई अब और भी गहरी हो चुकी थी | रुचिता भी कई बार मुझे फोन कर के बुलाती थी जब घर कोई नहीं होता था | उसने पहले ही कहा था गांड और मुहं में मैं उसे आज तक नहीं दे पाया हूँ |