दम लगा के चोद भोसड़ी के


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हेल्लो मेरे दोस्तों आज मैं आपसे मुखातिब हुआ हूँ क्यूंकि मैंने दारु पी रखी और दारु पीने के बाद आदमी सच ही बोलता है | मुझे कुछ नहीं समझ आ रहा दोस्तों पता नहीं मैं क्या करूँगा आगे क्यूंकि मेरी नौकरी लगने का आज आखरी मौका भी चला गया | मैंने इतना कड़ा परिश्रम किया है कि क्या बताऊ आपको | मेरा नाम बुधिया सिंह है और मैं झाबुआ से आता हूँ | मुझे मिलिट्री में जाने का बड़ा शौक था पर मुझे नहीं पता था की रिश्वत का कीड़ा हर जगह घुस चुका है | पर इससे आप लोगों को क्या आप तो कहानी सुनो और मस्त रहो अपनी दुनिया में | तो ये बात है आज से करीब 15 साल पहले की जब मैं दौड़ता था और मुझे इसके अलावा और कुछ भी नहीं दीखता था | मुझे मिलिट्री में जाने का इतना जूनून था कि बस पूछो मत | मेरे माँ बाप और सब मुझे मन करते रहते थे की बीटा आज तो बस यही रुक जा क्यूंकि तुझे देश की सेवा करके कुछ नहीं मिलेगा अगर मर गया तो बस तुझे सहीद करार दे देंगे और एक दो मैडल दे देंगे और कुछ नहीं | पर मुझे तो जाना था और मुझे कुछ करके दिखाना था और मुझे इस लक्ष्य के आगे कुछ नहीं दिखाई देता था | जब सब सो जाते थे तब में उठ के बहार जाता था दौड़ने के लिए और कुत्ते भी नहीं उठ पाते थे तब तक | इतना जूनून था मन में मेरे कि मैंने सब कुछ त्याग कर दिया था | मेरे मन में डर नाम की चीज़ नहीं थी बस डर था तो इस चीज़ का कि कही मैं किसी सी पीछे न रह जाऊं और मैं खुद को दिया हुआ वादा पूरा न कर पाऊं | मैं सुबह सुबह जब दौड़ना शुरू करता था तब मैं रुकता ही नहीं था मेरे दिल में एक धुन बजती रहती थी जो मुझे हर दम जगाये रखती थी | देखिये दो तरह के इंसान होते हैं इस दुनिया में | एक वो जो दुनिया की चमक में डूब जाते हैं और कमरे के अन्दर कसरत करते हैं और दौड़ते हैं | पर असली इंसान वही होता है जो अपनी माती में मिल जाए और उसी से सब कुछ सीखे मेरे पास तो जूते भी नहीं थे मैं नंगे पैर दौड़ता था |

 

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आपने कभी राणा प्रताप के बारे में सुना है | अगर नहीं सुना है तो सुनो उनका एक घोडा हुआ करता था जिसका नाम था चेतक | वो क्या घोडा था उसके बारे में किसीने कहा था चेतक जैसी तेज़ी किसीमे भी नहीं थी | एक इंसान ने चेतक की कला से प्रसन्न होकर कुछ कहा था वो मैं आपको आज सुनाता हूँ | “आगे नदिया पड़ी आप घोडा कैसे उतरे पार राणा ने सोचा इस पार तब तक चेतक था उस पार” बस मैं वही चेतक था पर कास उसे कोई राणा मिल जाता तो आज उसका जीवन कुछ और होता | पर मेरे साथ भी कुछ अच्छा हुआ था मैं जब दौड़ने जाया करता था तब एक लड़की भी दौड़ने जाया करती थी और वो राष्ट्रीय खेल खेला करती थी | वो रोज़ सुबह उसी समय पर निकलती थी जब में निकलता था पर उसके पास पूरे कपडे जूते और सब कुछ था | पर मैं तो चप्पल पहन कर ही निकल जाता था और जब मैदान में पहुँचता था तब मैं उसे भी उतार दिया करता था क्यूंकि वही एकलौती थी मेरे पास | पर मुझे लगता था जब मैं दौड़ना शुरू करता था तब वो रुक जाती थी और मुझे देखती रहती थी | पर मुझे तो दौड़ते वक़्त कुछ भी ध्यान नहीं रहता था और मैं बस अपने काम में मगन रहता था | एक दिन वो मेरे पीछे पीछे दौड़ने लगी और जब दौड़ना ख़तम हुआ तो उसने कहा कैसे कर लेते हो यार ये सब | मैंने कहा बस रोज़ रोज़ कसरत करता हूँ और रियाज़ करता हूँ दौड़ने का | उसने कहा तो नागे पैर ही दौड़ने लगते हो मैंने कहा मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि मैं नए जूते ले सकूँ | उसने कहा अच्छा मतलब करना क्या चाहते हो | मैंने कहा मैं  मिलिट्री में जाना चाहता हूँ और देश की सेवा करना चाहता हूँ | उसने कहा वाह यार ऐसा जूनून मैंने कहीं और किसी में भी नहीं देखा | उसने कहा सुनो कल से मेरे साथ चलना और जूते पेहें के दौड़ना | वो अगली सुबह मुझे मिली और उसके हाथ में पुराने जूते थे उसने मुझसे कहा इनको पहन के देखो आ रहे हैं क्या | मैं उन जूतों को पहना और मुझे वो टाइट हो रहे थे पर कुछ तो था मेरे पैरों में इसलिए मैंने कहा बहुत अच्छे हैं |

 

उसके बाद उसने कहा कि चलो अब नहीं तो हमे देर हो जाएगी और सूरज निकल आएगा | मैंने भी कह दिया और हम चल दिए अपनी मंजिल की तरफ | उसके बाद वो मुझे दौड़ने के अभ्यास सिखाने लगी और मेरे पैर पूरे खुलने लगे और मैं हवाओं से बातें करने लगा था | मुझे लग रहा था वो मुझे खुश है और मैं भी उसे बहुत कुछ सिखा देता था | मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा है मेरे साथ | फिर एक महीने की दौड़ के बाद उसने मुझसे कहा मेरी राष्ट्रीय प्रतियोगिता है अगर मैं इसको जीत गयी तो तुझे फ़ौज में मिलूंगी | मैंने कहा आप ज़रूर जीतोगे और उसे एक दिन और कसके रियाज़ करवाया | वो अगले दिन निकल गयी वहां से और 15 दिन बाद वो वापस आई और पूरे गाँव में जसं मन रहा था | वो जीत गयी थी और पूरे देस में उसका पहला स्थान था | वो अगली सुबह मेरे पास आई और मुझे मैदान में ही गले लगा लिया और कहा तेरी वजह से मिला है मुझे सब कुछ | मैंने कहा मैंने तो बस आपको इमानदारी से रियाज करवाया था बस बाकी तो आपकी मेहनत थी | उसने कहा हां पर अगर तू नहीं होता तो मैं  इतना नहीं कर पाती | मुझे भी खुसी हो रही थी और उसने कहा शादी करेगा क्या मुझसे | मैंने कहा यार मेरे पास तो नौकरी भी नहीं है और मैं तुझे कुछ नहीं दे पाऊंगा | उसने कहा मुझे कुछ नहीं चाहिए पर तू अच्छे ए सोच ले और उसके बाद मुझे जवाब दे देना | मैंने भी कहा ठीक है और फिर से अपनी दौड़ में जुट गया | वो भी अब मेरे बराबर से दौड़ने लगी थी और मुझे ये देखकर बहुत खशी हो रही थी | मैंने मन ही मन सोचा यार इसको नहीं खोना चाहता | मैंने तुरंत उसे रोका और कहा सुन मुझे तू बहुत पसंद है और तुझसे शादी करनी है मुझे | उसने फिर से मुझे गले लगा लिया और कहा मुझे पता था पर ये तो बता कि तू मिलिट्री में और मैं भी तो घर कौन देखेगा | मैंने कहा वो बाद में देखेंगे यार कौनसा मुझे नौकरी मिलेगी | अभी तक तो मिली नहीं तो आगे की उम्मीद कम है |

 

अगले दिन हम दोनों वही मैदान में मिले और ऐसे ही हर दिन मिलने लगे और घूमने फिरने जाने लगे | अब सबसे बड़ी दिक्कत ये थी कि मुझे घर वालों को बताना था | इसलिए मैंने एक प्लान बनाया और उससे कहा सुन तेरी इज्ज़त थोड़ी सी खतरे में होगी पर संभाल लेना | उसने कहा क्या करने वाला है तू तो मैंने कहा तुझे गर्भवती | अगली सुबह वो मुझे मिली और मैदान में बस हम दोनों ही होते थे | मैंने उसे गले लगाया और उसके चेहरे को चूमने लगा | वो भी मुझे पागलों की तरन चूम रही थी | फिर मैंने उसी ट शर्ट को उतारा और उसने टाइट कमीज पहनी थी  मैंने उसी के ऊपर से उसकी चुच्ची को चूमना और काटना शुरू कर दिया | उसे मज़ा आ रहा था तो उसने खुद ही उसे उतार दिया और अपना पेंट भी उतार दिया और ओनी चूत को रगड़ने लगी | वो  ऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्हऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्हऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्ह कर रही थी और मैं उसके निप्पल को काट रहा  और चूस रहा था | मैंने धीरे से उसकी चूत में ऊँगली डाली और उसके खूब जोर से अन्दर बाहर करने लगा | फिर उसने कहा चोद न मुझे और मैंने अपना लंड घुसा दिया उसकी चूत में |  ऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्हऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्हऊऊउम्म्म्म ऊऊन्न्ह्ह आआआअह्हह्हह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आअह्ह्ह्ह और चोद | आधे घंटे चोदने के बाद मैंने पूरा मुठ उसकी चूत में भर दिया और वो शांत हो गयी | फर हम दोनों चले गये और अगले दिन फिर से मैंने उसकी चूत में अपना माल गिराया | एक महीने तक चोद चोद के मैंने उसे गर्भवती कर दिया और घरवालों को मन लिया | पर वो फ़ौज में है और मैं बिना नौकरी के पर मेरे सपने वो पूरे कर रही है | और मुझे भी अच्छा लगता है क्यूंकि जिंदगी हसीं हो गयी है |