दारू के नशे का पूरा फायेदा उठाना कोई हमसे सीखे


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मेरा नाम सुरेश है और मैं गुडगाँव में रहता हूँ | मेरी उम्र 29 साल है और मेरा सीजन के हिसाबी से काम चलता है और मैं हर सीजन में अलग बिज़नस करता हूँ जिससे मुझे हर दम फायेदा ही हो | मेरे घर में ज्यादा लोग नहीं है |

मेरे घर के बाजू में एक शादीशुदा किराये से रहने के लिए आये थे । लड़के का नाम भुवन जो दिखने में एकदम काला था लेकिन उसकी बीवी एकदम मस्त माल थी जिसका नाम शाम्भवी था और उसका कद 5 फुट 4 इंच और  बूब्स 36 के,  कमर 30 और चूतड़ 36 के थे और सुन्दरता की बात करूँ तो भाभी दिखने में एकदम मस्त थी गोरी | भुवन पेट्रोल पम्प पर काम पर जाते थे उसका समय करीब-करीब सुबह 9  से रात के 8 बजे तक रहता था | हमारे घर वालों से वो जल्दी ही मिलजुल गए थे और मैं भी उसका यहाँ जाता आता रहता था | वो मेरा ही हमउम्र था इसीलिए वो मेरा अच्छा दोस्त बन गया ।

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रात को भुवन को पम्प से लेने के लिए मैं ही जाता था । हम वहाँ से निकलने के बाद रोज बार में दारू पीते थे और करीब 11 बजे तक घर पहुँचते थे । यह हमारा रोज का ही काम हो गया था । रोज भाभी मुझे बोलती थी कि आप इनके साथ बिगड़ गए हो | ऐसा करीब एक महीने तक चलता रहा । एक दिन हमको भुवन के दोस्तों ने खूब पिला दी जिसकी वजह से उसको कुछ भी होश नहीं रहा और  मैं उसको बाइक पर बिठा कर अपने साथ बांधकर घर लेकर आया और घर के अन्दर पलंग पर सुला दिया | भाभी ने उनको देखा और हंसने लगी | मैंने भाभी से पूछा भाभी आप हंस क्यूँ रही हो ? तो वो बोली रोज होश में आते आज होश भी नहीं बचा ? मैं कहा होता है भाभी कभी-कभी ज्यादा हो जाती है उसमें हंसने की क्या बात है | भाभी बोली वो सब ठीक है लेकिन अब ये खाना खायेंगे या नहीं ? मैंने कहा अब तो ये सीधा कल सुबह ही खायेंगे  इतना बोल कर मैं चलने लगा तो भाभी बोली सुरेश भैय्या इनको कोई तकलीफ तो नहीं होगी ना ज्यादा पीने से ? मैंने कहा कुछ नहीं होगा भाभी आप आराम से सो जाओ | भाभी बोली देखिये रोज होश में रहते हैं  आज कुछ ज्यादा ही पी गए | प्लीज आज के लिए आप यहीं सो जाओ ना |

मैंने कहा  ठीक है अगर आपको कोई तकलीफ नहीं तो मैं यहीं सो जाता हूँ | उन्होंने मेरे लिए नीचे बिस्तर बिछा दिया और वो पलंग पर भुवन के साथ सो गई | उसका कमरा छोटा था इसीलिए उनको भुवन के साथ सोना पड़ा । उन्होंने भुवन को दीवार से चिपका दिया और वो खुद मेरी तरफ़ पलंग पर सोई | लाइट अभी भी जल रही थी जिस वजह से मुझे नींद नहीं आ रही थी | मैं कभी इस तरफ कभी उस तरफ करवट ले रहा था | आधे घंटे के बाद भाभी बोली क्यूँ  आपको नींद नहीं आ रही क्या ? मैंने  कहा  भाभी, मुझे उजाले में सोने की आदत नहीं है इसीलिए नींद नहीं आ रही है | भाभी बोली ठीक है  मैं लाइट बंद कर देती हूँ और वो उठी और लाइट बंद करके सो गई । अब भी मुझे नींद नहीं आ रही थी | ऐसा करते करते मुझे कुछ घंटे बीत चुके थे भुवन खर्राटे लेकर मस्त सोया हुआ था | बाजु के घर में लाइट जल रही थी जिसकी वजह से थोड़ा बहुत अन्दर दिख रहा था | अब भाभी पूरी गहरी नींद में थी | नींद में ही वह करवट लेने लगी तो उनकी साड़ी का पल्लू नीचे मेरे ऊपर गिर गया | अब मुझे उसका दोनों स्तन ब्लाउज में बंधे हुए दिख रहे थे | यह देख कर मेरे दिमाग भाभी को छूने का और उसका स्तन को दबाने विचार आ रहा था जिस वजह से मेरा लंड खड़ा होने लगा । सोचा भुवन बेवड़ा तो सोया हुआ है क्यूँ ना मैं थोड़ा मजा कर लूँ | मैं उनकी ओर पलट गया और अपना हाथ ऊपर पलंग की ओर करके उनकी कमर पर रख दिया और धीरे-धीरे करके उसे आगे बढ़ाते हुए ब्लाउज तक पहुँच गया । अब मैं उसका बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से सहला रहा था और एक हाथ से अपने खड़े लंड को मसल रहा था | अभी भी भाभी नींद में ही थी | मेरी हिम्मत और बढ़ गई और  अब मैं अपने हाथ को उसका नंगे पेट पर भी घुमा रहा था जिसकी वजह से मेरा लंड आग-बबूला हो रहा था । अब मैं भाभी को चोदने की सोच रहा था । मैंने उनकी ब्लाउज के बटन खोलने का सोचा और उन्हें खोलना शुरु किया । अब तक 1-2 ही बटन खोले थे कि मुझे ऐसे महसूस हुआ जैसे भाभी मुझे देख रही है | मैं समझ गया कि भाभी को इस सब में मजा आ रहा है और उनको सब मालूम है कि मैं क्या कर रहा हूं । मैं उठ कर बैठ गया और अब जानबूझ कर उन्हें अपनी बीवी समझते हुए उसका बटन खोलने लगा । अब मैंने उसका सारे बटन खोल दिए थे | उन्होंने अन्दर ब्रा नहीं पहना था इसीलिए उनकी दोनों निप्पलस ब्लाउज से आज़ाद हो गई थे । गुलाबी निप्पलस रोशनी में चमक रहे थे लेकिन भाभी अभी भी सोने का नाटक कर रही थी लेकिन मुझे मालूम था कि वह जगी हुई है |

 

मैंने उसके निप्पलस को चूसना शुरु किया और अपने दोनों हाथों से उसका बूब्स को दबाना चालू रखा | धीरे-धीरे भाभी की गरम सांसें मुझे महसूस होने लगी और चुपके से हौले-हौले उन्होंने अपनी आँखें खोली। अब मुझे भाभी का कोई डर नहीं था और भाभी ने भी मेरे होंठों के साथ खेलना शुरु कर दिया था। मैंने भाभी को अपने पास नीचे बिस्तर पर ले लिया और मेरे पैरों पर बिठा कर उनको होंठों को चूसना शुरु किया । अभी 5 मिनट ही हुए होंगे कि भाभी ने मेरे लंड को पकड़ने की कोशिश की तो मैंने भी अपना लंड उनको समर्पित कर दिया | अब भाभी मेरे लंड को चड्डी के ऊपर से ही मसल रही थी और मैं उसके निप्पलस को मसल रहा था । धीरे-धीरे मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर कमर तक उठा लिया जिसकी वजह से उनकी चड्डी मुझे साफ दिखाई दे रही थी । मैंने उनकी चड्डी में अपना एक हाथ डाल दिया और अपनी उंगली उनकी चूत में डालने की कोशिश करने लगा तो वो सटाक से अन्दर चली गई क्योंकि उनकी चूत काफी गीली हो चुकी थी | हम दोनों भी इशारों में बात कर रहे थे क्योंकि भुवन हमारे नजदीक ही पलंग पर सोया हुआ था । अब भाभी से बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो उन्होंने मेरी चड्डी उतार दी और इशारों में ही मेरे लंड को अपनी चूत में डालने के लिए मनाने लगी । मैं भी वक़्त की नजाकत देखते हुए तैयार हो गया । अब भाभी खुद ही मेरे सामने अपनी चूत को फैला कर लेट गई और मुझे अपनी ओर खींचने लगी ।

मैंने भी उसका दोनों पैरों को अपने कन्धों पर ले लिया और अपने लंड को उनकी चूत के मुँह पर टिका दिया और एक जोरदार झटका मारते हुए पूरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया जिसकी वजह से वो जोर से चिल्लाई- …मर गई…आ ह्ह्ह… आह्ह्ह… तो मैंने उसका मुँह पर अपना एक हाथ रख दिया और धीरे-धीरे अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा। अब उसका दर्द कम हो गया था और वो मेरा साथ अपनी गांड को हिला-हिला कर दे रही थी । वो मुझे अपनी ओर खींचने की कोशिश भी कर रही थी तब मैं समझ गया कि अब स्पीड बढ़ानी चाहिए और मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी । लंड चूत को चीरता हुआ गपागप अन्दर-बाहर हो रहा था। भाभी की सांसें तेज हो रही थी | इधर लंड चूत को ठोक रहा था उधर हाथों से स्तन मर्दन हो रहा था | करीब 15 मिनट तक यही चलता रहा और अगले ही पल भाभी ने मुझे कस कर पकड़ लिया तो मैं समझ गया कि भाभी का पानी छूट गया | फिर भी मैं उनकी चूत को ठोक रहा था और वो निढाल होकर पड़ी थी | उसके तुरंत 2-3 मिनट के बाद मुझे ऐसे लगा कि अब मैं भी झड़ जाऊँगा तो मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और पूरा पानी भाभी की चूत में छोड़ दिया । थोड़ी देर के बाद हमने अपने-अपने कपड़े ठीक कर लिए और अपनी-अपनी जगह पर सो गए | दूसरे दिन भुवन पम्प पर जाने के बाद जब मैं भाभी से बात करने उसका कमरे पर गया तब भाभी ने बताया कि भुवन रोज दारू पीने के बाद सो जाता है और उसकी प्यास ऐसे ही अधूरी रह जाती है | उसके बाद मैं श्मभावी भाभी को अकसर जब भी मौका मिलता तब-तब चोदता था। मैंने भुवन के दारू पीने की लत का पूरी तरह से फायदा उठा लिया था | आज उसको 2 बच्चे है और हमारे गाँव में उसने घर बना लिया | मैं जब भी गाँव को जाता हूँ तब उसके यहाँ जरूर जाता हूँ और घर पर कोई नहीं रहता तब उर्मिला भाभी की चूत की प्यास जरूर बुझाता हूँ |