चाचा की लड़की के दुख में उसकी चूत को मारा


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मेरा नाम राहुल है मैं 26 वर्ष का नौजवान युवा हूं, मैंने अपना ही एक छोटा सा बिजनेस शुरू किया है, मेरा बिजनेज़ अच्छा चल रहा है। मैं कॉस्मेटिक का सामान सप्लाई करवाता हूं, मेरे पास लड़कियों का सारा सामान रहता हैं और मेरे जितने भी क्लाइंट है वह सब मुझसे सामान ले जाते हैं और उनकी बहुत ही बड़ी बड़ी दुकान है। मैं उन्हें सामान होलसेल में देता हूं और वह अपनी दुकान पर आगे रिटेल प्राइस में वह सामान बेचते हैं इसलिए उन्हें उस सामान में बहुत मार्जिन होता है। मेरा काम भी बहुत अच्छा चल रहा है। मैंने अपने काम के लिए कुछ लड़के भी रख लिए हैं जो कि मार्केटिंग का सारा काम संभालते हैं। मुझे अपना काम करने में बहुत ही अच्छा महसूस होता है क्योंकि मैं पहले से ही कोई बिजनेस शुरू करना चाहता था इसलिए मैंने यह बिजनेस सुरु किया और मैं अपने काम से भी बहुत खुश हूं।

मेरे पिताजी भी अपना ही कारोबार करते हैं। उनकी एक दुकान है जिसमें कि वह घर का सामान रखते हैं, उन्हें वह दुकान चलाते हुए काफी समय हो चुका है और उनका काम भी बहुत अच्छे से चल रहा है। मेरा छोटा भाई अभी कॉलेज में ही पड़ रहा है इसलिए वह घर के सारे काम देखता है और घर पर ही रहता है। वह मेरी मम्मी के साथ बहुत मदद करता है इसलिए हमें घर की बिल्कुल भी चिंता नहीं होती क्योंकि वह घर का सारा काम अच्छे से संभाल लेता है। हमारे चाचा भी हमारे घर के पास में ही रहते हैं, वह हमारे घर पर अक्सर आते रहते हैं। एक दिन मेरे चाचा हमारे घर पर आए और कहने लगे कि हमने गौतमी का रिश्ता कर दिया है, मेरे पिताजी ने मेरे चाचा से पूछा कि तुमने मुझे इस बारे में बताया ही नहीं, वह कहने लगे बस यह सब जल्दी बाजी में हो गया। गैतमी और मेरी उम्र बराबर है इसलिए हम दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त भी हैं। हम दोनों एक साथ पढ़ाई करते थे और मैंने जब इस बारे में गौतमी से पूछा तो वह कहने लगी बस जल्दी में ही सब हो गया। अब उसकी शादी का समय भी नजदीक था। जब उसकी शादी होने वाली थी तो हम लोगों ने घर का सारा काम करने लगे। मेरे भाई और मैंने ही घर का सारा काम संभाला क्योंकि गौतमी की छोटी बहन है, वह अभी स्कूल में पढ़ रही है और हमने ही उनके घर का सारा काम संभाला।

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अब गौतमी की शादी हो चुकी थी और मेरे चाचा भी बहुत खुश थे। मैं भी अपने काम में व्यस्त था, मैं किसी से ज्यादा संपर्क में नहीं रहता था और ना ही मैं अपने घर पर ज्यादा बात कर पाता था क्योंकि मेरे पास घर के लिए समय नहीं होता था। गौतमी की शादी को काफी टाइम हो चुका था लेकिन जब वह घर आई तो वह बहुत दुखी दिखाई दे रही थी। मैंने उससे पूछा कि तुम बहुत ही उदास दिखाई दे रही हो, वह कहने लगी कि मेरे और मेरे पति के बीच में बिल्कुल भी बात नहीं हो पाती इसलिए मैं उन्हें डिवोर्स देने की सोच रही हूं। मैंने उसे बोला कि तुम्हारी तो शादी कुछ समय पहले ही हुई है, वह कहने लगी कि मेरे पति और मेरे बीच में बहुत झगड़े होते हैं, जिस वजह से मैं उनके साथ अब अपनी आगे की लाइफ नहीं बिता सकती इसलिए मैंने उन्हें डिवोर्स देने का फैसला कर लिया है। वह मेरे चाचा के साथ ही थी, चाचा इस बात से बहुत ज्यादा दुखी थे और वह मुझे कहने लगे कि तुम गौतमी को इस बारे में समझाओ की झगड़े तो होते हैं परंतु उन चीजों को बैठकर भी सुलझाया जा सकता है लेकिन वह तो अपने पति से बिल्कुल भी बात करने को तैयार नहीं थी और ना ही वह किसी की भी बात सुनने को तैयार थी। मेरे पिताजी ने भी उसे बहुत समझाया परंतु उसने मेरे पिताजी की भी बात नहीं मानी और वह सिर्फ अपनी जिद पर अड़ी हुई थी कि मुझे उस घर में बिल्कुल भी नहीं जाना। गौतम घर पर ही थी लेकिन उसका पति भी उससे मिलने के लिए एक बार भी नहीं आया, मेरे चाचा ने उसके पति को कई बार फोन किया लेकिन वह भी घर पर उसे मिलने नहीं आया, ना ही उसके ससुराल से कोई भी उसके बारे में पूछने आया। हम सब भी समझ चुके थे कि मेरे चाचा ने जल्दी बाजी में गलत लड़का चुन लिया। मैं गौतमी को समझाने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह बहुत ज्यादा दुखी थी और मुझे उसे देख कर बहुत बुरा लग रहा था। जिस प्रकार से वह मेरे सामने रो रही थी, मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था।

मैंने उस दिन उसे चुप कराया और अपने घर आ गया लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ गौतमी का चेहरा आ रहा था और मैं सोच रहा था कि यदि उसका डिवोर्स हो गया तो उसकी जिंदगी खराब हो जाएगी और वह घर पर ही न रहेगी क्योंकि उसके बाद कोई भी उससे शादी नहीं करने वाला था। मेरे माता-पिता ने भी गौतमी से इस बारे में चर्चा की, परंतु उसने मेरे माता-पिता की बात भी नहीं मानी और वह बहुत ज्यादा ही गुस्से में थी। उसने साफ इंकार कर दिया कि मुझे अपने पति के साथ अब बिल्कुल भी समय नहीं बिताना और ना ही उसके साथ मुझे रहना है, मैं अपना जीवन आप अपने तरीके से ही चलाना चाहती हूं। मेरे माता-पिता और हम लोग साथ में बैठे हुए थे,  मेंरे पिताजी ने जब गौतमी के बारे में बात की तो सब लोग बहुत दुखी थे। मुझे भी उसे देख कर बहुत दुख हो रहा था इसलिए मैं उठ के वहां से गौतमी के कमरे में चला गया। जब मैं उसके कमरे में गया तो वह कुर्सी पर बैठी हुई थी और अपने ही ध्यान में थी उसने मुझसे बिल्कुल भी बात नहीं की। जब मैंने उससे बात की तो उसने मुझसे उसके बाद बात करनी शुरू की। मैंने उसे बहुत समझाया परंतु अब वह बिल्कुल भी सुनने को तैयार नहीं थी।  मैंने उसे कसकर पकड़ लिया जब मैंने उसे कसकर पकड़ा तो गौतमी के स्तन मेरे हाथ में आ गए और मैं उसके स्तनों को दबाने लगा। वह मेरी तरफ देखने लगी और मैंने उसके स्तनों को बड़ी तेजी से दबाना शुरू कर दिया।

मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो उसने तुरंत ही अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को समा लिया और बड़े अच्छे से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर करने लगी। मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होता जब वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले रही थी उसने अपने गले के अंदर तक मेरे लंड को ले लिया और मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने भी उसके कपड़े खोल दिए मैने जब उसका नंगा बदन देखा तो उसके शरीर में एक भी बाल नहीं था  उसका शरीर पूरा खिला हुआ था। मैंने जब उसके स्तनों पर हाथ लगाया तो वह मचलने लगी और मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। मैंने काफी देर तक उसके स्तनों को चूसा और उसके बाद मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए उसे बिस्तर पर लेटा दिया। मैंने उसकी योनि को काफी देर तक चाटा जिससे कि उसे बहुत अच्छा महसूस होने लगा और जैसे ही मैंने अपने लंड को गौतमी की योनि में डाला तो उसके मुंह से चीख निकल पड़ी और वह बहुत तेज चिल्लाने लगी। मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा जब मैं उसे धक्के दिए जा रहा था मुझे बड़ा आनंद आ रहा था जब मैं उसे बड़ी तेजी से चोद रहा था। उसका शरीर पूरा खिला हुआ था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसे झटके दिए जा रहा था। काफी देर तक मैंने उसे झटके दिए और उसके बाद मैंने उसे घोड़ी बना दिया। जब उसकी बडी बडी चूतडो को मैंने देखा तो उन्हें मैं अपने हाथों से दबाने लगा और मैंने तुरंत ही अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाल दिया। मैने उसके चूतड़ों को बहुत कसकर पकड़ा हुआ था मैं उसे बड़ी तेज धक्के देता और वह भी अपनी चूतडो को मुझसे मिलाया जा रही थी। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और वह भी पूरे मूड में आ चुकी थी मैंने उसे इतनी तेज तेज धक्के मारे की उन्ही झटकों के बीच में मेरा वीर्य गौतमी की योनि के अंदर चला गया। जब मैंने अपने लंड को उसकी योनि से बाहर निकाला तो उसकी योनि से मेरा वीर्य टपक रहा था और उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। उसके बाद से मैं ही उसकी इच्छा को पूरा करता हूं और अब उसे किसी भी चीज का दुख नहीं है वह बहुत ही खुश रहती है उसके चेहरे पर बिल्कुल भी दुख का भाव नहीं होता।


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