अपना घर भी याद ना रहा


antarvasna, hindi sex story मेरा नाम मोहिनी है और मैं लखनऊ की रहने वाली हूं मैंने घर पर ही अपना एक छोटा सा उद्योग खोला था मैं घर पर साबुन बनाने का काम करती हूं और आसपास के लोग तो मुझसे साबुन लेकर जाते ही हैं क्योंकि मेरी साबुन की क्वालिटी बड़ी ही अच्छी है लेकिन मैं अपने काम को बडाना चाहती थी और उसके लिए मुझे पैसों की जरूरत थी, उस वक्त मुझे मेरे पति ने कहा कि तुम बैंक में लोन के लिए अप्लाई क्यों नहीं कर देती तुम्हें तो बैंक से लोन भी मिल जाएगा, मैंने अपने पति से कहा तुम्हें तो मालूम है मैं ज्यादा पढ़ी लिखी हूं नहीं और मुझे लिखने पड़ने का काम बिल्कुल भी नहीं आता, तुम ही मेरे साथ चलना और मेरे लिए बैंक में लोन अप्लाई करवा देना, वह कहने लगे ठीक है मैं तुम्हारे लिए बैंक में लोन अप्लाई करवा दूंगा। वह एक दिन मुझे बैंक में लेकर चले गए और बैंक में हम लोगों ने लोन अप्लाई करवा दिया मैं तो अपना काम करती रही मेरे पास दो महिलाएं घर में ही काम किया करती थी हम लोग कपड़े धोने के साबुन घर में बनाया करते थे।

कुछ समय बाद मेरा लोन भी पास हो गया और जब मेरा लोन पास हुआ तो उस वक्त मैंने सोचा कि अपने काम को और बढ़ा लिया जाए इसके लिए मैंने एक छोटी सी जगह किराए पर ले ली वह जगह ठीक-ठाक थी क्योंकि मैं जानती थी कि कम से कम पैसों में ही अच्छा काम शुरू हो जाए और मैंने उस जगह पर अपना काम करना शुरू कर दिया मैंने अपना काम करना शुरू किया तो मुझे काफी अच्छे लोगों का सहयोग मिलने लगा और मेरे पास से काफी लोग सामान भी ले जाने लगे अब मेरा काम चलने लगा था इसलिए मुझे बड़ी जगह चाहिए थी तो वहीं पास में एक बड़ा सा गोदाम खाली था मैंने वह गोडाउन किराए पर ले लिया और जब मैंने वह गोडाउन किराए पर लिया तो मुझे नहीं पता था कि मेरा काम इतना बड़ने लगेगा लेकिन अब मुझे अपने काम को और भी ज्यादा बढ़ाना था इसके लिए मुझे एक बड़े डिस्ट्रीब्यूटर की सहायता चाहिए थी मैंने अब डिस्ट्रीब्यूटर से मिलने की सोची मैंने कई डिस्ट्रीब्यूटर से मुलाकात की लेकिन मुझे कोई भी ऐसा नहीं लगा कि जो मुझे मेरे सामान का सही रेट दे पाता।

एक दिन मेरी मुलाकात सोहन से हुई वह भी बहुत बड़े डिसटीब्यूटर हैं और लखनऊ के आसपास के एरिया में उनका सामान जाता है, मैंने उन्हें अपने सामान की क्वालिटी को दिखाया तो वह कहने लगे क्वालिटी में तो कोई दिक्कत नहीं है लेकिन मैं शुरुआत में शायद आपको इतने पैसे नहीं दे पाऊंगा परंतु मैं आपको यह कह सकता हूं कि आपको कभी भी कोई दिक्कत नहीं होगी आप यदि मेरे साथ काम करेंगे तो आपका काम बहुत अच्छा चलेगा, मैंने भी सोचा कि चलो एक बार सोहन जी के साथ काम कर ही लिया जाए क्योंकि मुझे अपने काम को बढ़ाने के लिए किसी व्यक्ति की आवश्यकता तो थी और सोहन जी बहुत बड़े डिस्ट्रीब्यूटर हैं उन्होंने मुझे कहा देखिए मोहनी जी आपको मेरे साथ काम करने में कभी कोई शिकायत नहीं आएगी और यदि आप एक बार मेरे साथ काम करेंगे तो आपको भी अच्छा लगेगा। मैंने भी सोहन के साथ काम करने का फैसला कर लिया था मैंने जब इस बारे में अपने पति से पूछा तो मेरे पति कहने लगे कि यदि तुम्हें उनके साथ काम करना अच्छा लगता है तो तुम उनके साथ काम कर सकती हो और वैसे भी किसी ना किसी की तो तुम्हें सहायता चाहिए ही होगी यदि तुम्हें अपने काम को बढ़ाना है तो, मेरे पति भी मेरे काम से बहुत ज्यादा खुश थे क्योंकि उनकी सरकारी नौकरी है इसलिए वह अपनी नौकरी तो नहीं छोड़ सकते लेकिन वह मुझे हमेशा ही अपना पूरा सहयोग दिया करते हैं और हमेशा ही मुझे कहते कि तुम्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है जब तक मैं तुम्हारे साथ हूं तुम्हें कोई भी दिक्कत लेने की जरूरत नहीं है। मैंने और सोहन जी ने मिलकर काम शुरू कर दिया मैंने जब पहली बार उन्हें अपने साबुन का स्टॉक भेजा तो उन्होंने वह कुछ ही दिनों में खत्म कर दिया और उसके बाद दोबारा से मेरे पास से वह साबुन का स्टॉक ले गए, अब वह रोज मेरे यहां से छोटी गाड़ी सोहन जी के गोडाउन में जाने लगी और वहां से वह आगे अपना सामान भिजवा दिया करते, धीरे-धीरे काम बढ़ने लगा था इसलिए मुझे अपने पास और भी लोग काम पर रखने पड़े, मेरे पास 20 लोग काम पर हो चुके थे क्योंकि मेरा काम अच्छा चलने लगा था इसलिए मुझे उन्हें रखने में कोई भी दिक्कत नहीं थी जिससे कि मैं उन लोगों को रोजगार भी दे रही थी और वह लोग मेरे साथ काम कर के भी खुश थे क्योंकि मैं किसी पर भी कभी कोई काम का दबाव नहीं डालती थी।

एक दिन चौहान जी मेरे गोडाउन में आए और वह कहने लगे कि मैडम आप के सामान की तो डिमांड बढ़ती जा रही है आपको अपने पास और लोग काम पर रखने पड़ेंगे, मैंने उन्हें कहा लेकिन क्या मैं आपको इतनी बड़ी क्वांटिटी में सामान दे पाऊंगी, वह कहने लगे कि अब आपके सामान की डिमांड बढ़ने लगी है और आप को लोगों तक यह सामान पहुंचाना हीं पड़ेगा तभी जाकर आपको मुनाफा मिलेगा। मैंने भी अपने पास और भी ज्यादा कर्मचारी काम पर रख लिए मेरे यहां से अब दिन में तीन चार छोटे ट्रक सामान के जाने लगे थे संजीव जी की मार्केट में बहुत अच्छी पकड़ है और उनकी एक अलग ही छवि है जिस वजह से वह सामान उनके पास ज्यादा समय तक नहीं रह पाता था और मुझे उनके साथ काम करना अच्छा लग रहा था वह समय पर मुझे पैसे दे दिया करते हैं और कभी भी पैसों से संबंधित कोई शिकायत नहीं आई जिस वजह से मुझे काम करना भी अच्छा लग रहा था, मैंने अपने बैंक का लोन भी चुका दिया था।

मेरे पति भी बहुत खुश थे और उन्होंने कहा कि मोहनी तुमने तो बहुत अच्छा काम किया लेकिन मैं शायद अपने बच्चों को समय नहीं दे पा रही थी मैं अपने काम की वजह से बहुत व्यस्त रहने लगी थी इसलिए मैंने अपनी दुकान में अपने ममेरी बहन को काम पर रख लिया उसका तलाक हो चुका है और वह मेरे पास एक दिन काम की तलाश में आई थी उसने मुझे कहा दीदी तुम मुझे अपने पास काम पर रख लो क्योंकि उसके पास कोई भी काम नहीं था और उसकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी इसलिए मैंने उसे काम पर रख लिया, वह काम के प्रति बहुत ही ईमानदार है और काम को अच्छे से संभाल लेगी जिस वजह से मैं भी घर पर समय दिया करती और मेरे पति को भी मुझसे कोई शिकायत नहीं थी क्योंकि मैं घर पर पूरा समय दिया करती और अपने गोदाम भी समय पर चली जाती काम भी ठीक-ठाक चल रहा था यह संजीव जी के वजह से ही चल रहा था लेकिन एक बार मुझे सामान में बहुत ज्यादा नुकसान हो गया क्योंकि जिस वक्त डाउन में हम लोगों ने अपना सामान रखा था वहां पर एक दिन आग लग गई जिसकी वजह से मेरे सामान को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ और मुझे बहुत टेंशन भी हो गई मेरा काम अब धीरे धीरे कम होने लगा संजीव जी एक दिन मेरे पास आये और कहने लगे मैडम यदि हम लोग समय पर सामान लोगों तक और दुकानदारों तक नहीं पहुंचा पाए तो कोई दूसरा आकर आप की जगह ले लेगा इसलिए आपको जल्द से जल्द कुछ करना पड़ेगा। मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था क्योंकि उस दिन वह आग पता नहीं किसकी वजह से लगी परंतु मुझे तो नुकसान हो ही चुका था लेकिन धीरे-धीरे मैंने अपने काम को दोबारा से शुरू कर लिया और दोबारा से हमारे साबुन मार्केट में उतर गये संजीव जी मुझे कहने लगे कि आप बड़ी ही मेहनती हैं और वह हमेशा मेरी तारीफ किया करते हैं। सोहन जी मुझे बिजनेस में बहुत ज्यादा सपोर्ट किया करते और उन्ही की वजह से शायद मेरा बिजनेस इतना ज्यादा फल फूल पाया था। मैं सोहन जी की बड़ी ही इज्जत किया करती थी उनके बिजनेस कि मैं कायल थे।

एक दिन वह मुझे कहने लगे मुझे आज तो आप बड़ी ही सुंदर लग रही हैं उस दिन मैंने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी और उस दिन मैं वाकई में बहुत ज्यादा सुंदर लग रही थी मैं अपने आप पर ज्यादा ध्यान नहीं देती थी। सोहन जी ने मुझे देखा तो वह मेरी तारीफ करने लगे उसके बाद तो अक्सर वह मेरी तारीफ किया करते लेकिन मुझे नहीं पता था कि वह मुझ पर डोरे डाल रहे हैं। उन्होंने मुझे अपने बातों में पूरी तरह से फंसा लिया वह तो मेरे साथ सिर्फ सेक्स करना चाहते थे। एक दिन उन्होंने मुझे कहा मैंने अपने घर पर एक छोटी सी पार्टी रखी है और आपको आना पड़ेगा। मैं उस दिन उनके घर पर चली गई जब मे उनके घर पर गई तो वहां पर कोई भी नहीं था वहां पर सिर्फ सोहन बैठे हुए थे। वह कहने लगे आप आ गई मैंने उनसे पूछा आपने तो घर पर किसी को भी नहीं बुलाया है।

वह कहने लगे मैंने तो सिर्फ आपको ही बुलाया था वह मेरे पास आकर बैठ गए उन्होंने मेरे सामने शराब का एक पेग रखा मैंने वह पी लिया। उसके बाद तो मुझे नशा हो गया मैंने जैसे ही उनके होठों को चुसना शुरू किया तो मुझे ऐसा महसूस हुआ मेरे अंदर से आग निकल रहा है मुझे बहुत अच्छा लगा। जैसे ही सोहन ने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने उनके लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू कर दिया। उनके लंड को मुंह में लेकर चूसने मे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जैसे ही उन्होंने मेरे कपड़े उतारकर मुझे नंगा किया तो उन्होंने मुझे घोडी बना दिया। सोहन जी ने मेरी गांड को अपने हाथ से पकड़ा हुआ था मुझे बहुत ज्यादा दर्द महसूस हो रहा था वह लगातार तेजी से मुझे धक्के दे रहे थे। वह मुझे इतनी तेजी से धक्के मारते कि मेरा शरीर हिल जाता मेरे अंदर एक अलग ही जोश पैदा हो जाता जब हम दोनों के बीच पूरी तरीके से सेक्स को लेकर संतुष्ट हो गई तो उन्होने मुझे छोड़ दिया और कहा आओ बैठकर हम दोनों एंजॉय करते हैं। हम दोनों ने उस दिन जमकर शराब पी उन्होंने उसके बाद मुझे बड़े अच्छे तरीके से उस दिन चोदा। मुझे याद नहीं रहा कि मेरा घर है मैं उस दिन सोहन जी के साथ ही रुक गई।


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